
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ को रद्द कर दिया। इस 6-3 के फैसले में कोर्ट ने कहा कि IEEPA राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं देता।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने इस फैसले के बाद भारत सरकार से सवाल किया है कि इससे भारत और अमेरिका के बीच 6 फरवरी 2026 को घोषित ट्रेड डील फ्रेमवर्क पर क्या असर पड़ेगा। उन्होंने एक कॉलम और X पोस्ट में कहा कि अब दोनों देश 2 अप्रैल 2025 से पहले वाली स्थिति में लौट आएंगे।
चिदंबरम ने पूछा, “अमेरिका द्वारा भारत को दी गई रियायतों का क्या होगा? भारत ने अमेरिकी सामानों पर जीरो टैरिफ और गैर-टैरिफ बैरियर हटाने पर सहमति जताई थी, साथ ही 500 बिलियन डॉलर का आयात करने का इरादा जताया था। उन वादों का क्या होगा?”
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय ट्रेड डेलीगेशन अभी अमेरिका में फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के टेक्स्ट को फाइनल करने के लिए मौजूद है। अब यह टीम क्या करेगी? सरकार को स्पष्ट करना होगा कि इस फैसले का 6 फरवरी की ‘डील’ पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
ट्रंप ने फैसले के बाद ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जो बैलेंस-ऑफ-पेमेंट्स घाटे के लिए 150 दिनों तक लागू रह सकता है। इससे भारत-US ट्रेड संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है।



