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सुप्रीम कोर्ट ने शादी से पहले सहमति से शारीरिक संबंध पर सवाल उठाए: “अजनबी कैसे विश्वास करें?” जमानत याचिका पर सुनवाई जारी

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण मामले में शादी से पहले सहमति से शारीरिक संबंध बनाने पर गंभीर सवाल उठाए। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने कहा कि शादी से पहले लड़का-लड़की “पूर्ण अजनबी” होते हैं, इसलिए ऐसे संबंधों में सावधानी बरतनी चाहिए।

जस्टिस नागरत्ना ने मौखिक टिप्पणी में कहा, “शायद हम पुराने ख्यालों वाले हैं, लेकिन हम समझ नहीं पाते कि शादी से पहले शारीरिक संबंध कैसे बनाए जा सकते हैं। किसी पर भी भरोसा न करें, बहुत सतर्क रहें।”

यह टिप्पणी एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जिसमें आरोप है कि उसने मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर मिली 30 वर्षीय महिला को शादी का झूठा वादा करके शारीरिक संबंध बनाए। महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे दुबई ले जाकर संबंध बनाए, बिना सहमति के इंटिमेट वीडियो रिकॉर्ड किए और धमकी दी। बाद में पता चला कि आरोपी पहले से शादीशुदा था और जनवरी 2024 में दूसरी शादी कर ली।

निचली अदालत और दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत खारिज की थी। सुप्रीम कोर्ट ने महिला से दुबई जाने के बारे में सवाल किया और कहा कि संबंध सहमति से लगते हैं। बेंच ने मुआवजा देने और मीडिएशन से सुलझाने का सुझाव दिया। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी।

कोर्ट ने ऐसे मामलों को ट्रायल के लिए उपयुक्त नहीं बताया और व्यक्तिगत मामलों में राज्य को न घसीटने की सलाह दी।

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