1988 के बाद दूसरी बार लगी धारा 288, किसानों ने यूपी गेट पर ही बसा दिया गांव

कृषि कानून के विरोध में प्रदर्शन करने पहुंचे किसान अपनी मांगों को लेकर पीछे हटते दिखाई नहीं दे रहे हैं। कृषि कानूनों के विरोध में भाकियू ने अपने आदोलन के तीसरे दिन यूपी गेट पर गांव का रुप दे दिया है। लगातार फ्लाईओवर पर खुले में सर्द रातों में ठिठुरते किसानों ने सोमवार को झोपड़ियां बना ली। इसी के साथ दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर साल 1988 के बाद दूसरी बार धारा 288 लगाने का ऐलान किया गया।

किसानों की ओऱ से लगाई गयी धारा 288 दरअसल प्रशासन की धारा 144 का जवाब है। धारा 288 के तहत पुलिस को किसानों की हद में नहीं आने दिया जाता है। वहीं आपको बता दें कि राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने तीन दिसंबर को सरकार से वार्ता होने तक यूपी के गेट पर ही डटे रहने के ऐलान किया है। उन्होंने साफ कहा है कि इस वार्ता के बाद ही आगे की कोई रणनीति तैयार की जाएगी। किसानों के लगातार जारी इस प्रदर्शन के बीच भारी संख्या में किसानों का यूपी गेट पर पहुंचना जारी है। दिन चढ़ने के साथ ही किसानों की मौजूदगी यूपी गेट के नजारे को बदलती रहती है

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