
उत्तर प्रदेश के गंगा एक्सप्रेसवे पर भारी बारिश के बाद करीब 10 मीटर गहरा गड्ढा बन गया है। यह क्षति किलोमीटर 421 के पास मेरठ-प्रयागराज कैरिजवे पर हुई है, जहां सड़क और आसपास के तटबंध का एक हिस्सा बह गया। गड्ढा एक्सप्रेसवे की रेलिंग पर बना, जिसके बाद उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीईआईडीए) ने मरम्मत के लिए टीम भेजी है।
यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 अप्रैल को इस 594 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के उद्घाटन के महज चार महीने बाद हुई है। 36,000 करोड़ रुपये की लागत से बने इस छह लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे को मेरठ से प्रयागराज तक यात्रा का समय करीब 12 घंटे से घटाकर छह घंटे करने के लिए बनाया गया था। यह 12 जिलों से होकर गुजरता है। उद्घाटन के समय प्रधानमंत्री ने इसे उत्तर प्रदेश के विकास के लिए नया लाइफलाइन बताया था।
यह इस मार्ग पर पहली समस्या नहीं है। जुलाई में उन्नाव के सोनिक टोल प्लाजा से जुड़ने वाले सात मीटर लंबे अप्रोच रोड पर भी भारी बारिश के बाद मिट्टी कटाव और कैरिजवे का हिस्सा ढहने की घटना हुई थी।
नवीनतम क्षति ने एक बार फिर इस महत्वाकांक्षी परियोजना की मजबूती, निर्माण गुणवत्ता और भारी बारिश वाले क्षेत्रों में ड्रेनेज व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यूपीईआईडीए के अधिकारी मौके पर पहुंच चुके हैं और मरम्मत का काम चल रहा है। क्षति का कारण और क्या निर्माण में कोई कमी जिम्मेदार है, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।



