भोपाल में चल रही ‘नोटबंदी से मिले दर्द’ पर चर्चा

भोपालभोपाल: केंद्र सरकार के नोटबंदी के 50 दिन बाद भी समस्याएं बरकरार रहने पर सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) ने मध्यप्रदेश की राजधानी में ‘चौराहे पर चर्चा’ का आयोजन किया। इस चर्चा में हिस्सा लेने पहुंचे लोगों ने नोटबंदी के चलते मिला दर्द खुलकर बयां किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी के ऐलान के बाद 50 दिन का समय मांगा था और कहा था कि यदि 50 दिन बाद भी यदि कोई कमी रह जाए तो उन्हें देश के जिस चौराहे पर बुलाकर जो भी सजा दी जाएगी, उन्हें स्वीकार्य होगी। इसी को लेकर आप की राज्य इकाई ने सोमवार को भोपाल के जिंसी चौराहे पर चर्चा का आयोजन किया। इस आयोजन में प्रधानमंत्री मोदी को बुलाया गया था, मगर वे नहीं पहुंचे।

जिंसी चौराहे पर सोमवार को आप द्वारा आयोजित चर्चा में मौजूद आम लोगों ने नोटबंदी से हुई परेशानियों का वर्णन किया।

किसान रमाकांत पटेल ने कहा कि तीन साल से सूखा था, पर इस बार अच्छी फसल होने के बावजूद नोटबंदी के कारण सारी फसल मंडी में पड़ी हुई है। आधे रेट पर भी कोई खरीदने को तैयार नहीं है।

भोपाल निवासी महबूब ने बताया कि उनके दोनों बच्चों की नौकरी चली गई है। गरीबी के इस दौर में जीना बहुत मुश्किल हो गया है।

पेशे से पेंटर मोहम्मद अजाज का कहना था कि जब से नोटबंदी हुई है, उनके खाने-पीने के लाले पड़ गए हैं, काम-धंधा बंद है। क्या करें कुछ सूझ नहीं रहा है।

आप के प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल ने कहा कि नोटबंदी ने देश की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है, किसान परेशान है, लाखों लोगों की नौकरियां जा रही हैं। अपना ही पैसा पाने के लिए बैंक की कतार में घंटों खड़े रहने के कारण सौ से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने करीबी उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए नोटबंदी का फैसला लिया, उनके बैंक कर्ज माफ किए जा रहे हैं। कालाधन और भ्रष्टाचार मिटाने की बात वे महज लोगों को गुमराह करने के लिए कह रहे हैं।

अग्रवाल ने कहा, “नोटबंदी के 50 दिन बाद एक बात साफ हो गई है कि प्रधानमंत्री की नीति और नीयत दोनों खराब है। हमने उन्हें जिंसी चौराहे पर बुलाया था, मगर वे नहीं आए। इससे स्पष्ट है कि उनकी हर बात जुमला है, भरोसे के लायक नहीं है।”

उल्लेखनीय है कि आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को नई दिल्ली में नोटबंदी को एक बड़ा घोटाला बताते हुए इसकी स्वतंत्र जांच और इस पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की थी।

उन्होंने यह भी कहा था, “8 नवंबर को 86 प्रतिशत नोट अर्थव्यवस्था से वापस लेने के फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया भर में मजाक के एक पात्र बन गए हैं। दुनिया भर में मोदी का मजाक उड़ना शुरू हो गया है। कम से कम मनमोहन सिंह (पूर्व प्रधानमंत्री) को दुनिया में सम्मान तो प्राप्त था।”

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