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नम आंखों से शहीद जवान को दी गई अंतिम विदाई

खोवई (त्रिपुरा)। जम्मू के निकट सेना के एक शिविर में आतंकवादियों से लोहा लेने के दौरान शहीद हुए भारतीय सेना के जवान चित्तरंजन देबबर्मा को शुक्रवार को हजारों ग्रामीणों ने नम आंखों से विदाई दी। अगरतला से 80 किलोमीटर उत्तर गाईशिंग पारा में जहां शहीद का अंतिम संस्कार किया जा रहा था, वहां भारी संख्या में पुरुष, महिलाएं तथा बच्चे मौजूद थे।

भारतीय सेना के जवान

धर्म से ईसाई नायक देबबर्मा (36) की अंत्येष्टि पूरे राजकीय सम्मान के साथ की गई। इस दौरान उनके पिता मधुसूदन (84), माताजी संचानी (79), पत्नी नमिता तथा 11 एवं सात साल के दो बच्चे भी मौजूद थे।

इस दौरान, राज्य के वन मंत्री नरेश जमातिया तथा वरिष्ठ नागरिक अधिकारी, सैन्य अधिकारी तथा सुरक्षा अधिकारी मौजूद थे।

शहीद का पार्थिव शरीर गुरुवार को त्रिपुरा पहुंचा।

देबबर्मा साल 1998 में सेना की अभियंता शाखा में शामिल हुए थे। कुछ महीने पहले ही उनका तबादला पश्चिम बंगाल के कंचरापाड़ा से जम्मू के नगरोटा में हुआ था।

शहीद की पत्नी नमिता ने कहा, “जब सेना के शिविर पर आतंकवादियों ने हमला किया था, तो उन्होंने हमें फोन किया था और उनके लिए दुआ मांगने को कहा था। वह कह रहे थे कि वह मारे जा सकते हैं, क्योंकि आतंकवादियों ने शिविर को घेर रखा है।”

उन्होंने कहा, “वह इस साल जून में घर आए थे और कहा था कि वह अगले महीने घर आएंगे। हम उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे। लेकिन उनका पार्थिव शरीर घर आया।”

देबबर्मा के बड़े भाई अरुण इस साल मार्च में सेना से सेवानिवृत्त हुए हैं।

एक सप्ताह के अंदर जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवादी हमले में शहीद होने वाले वह त्रिपुरा के दूसरे जवान हैं।

इससे पहले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के हवलदार शंभु सतमुरा (34) पुंछ जिले में 22 नवंबर को भारत-पाकिस्तान सीमा पर बारूदी सुरंग के विस्फोट में शहीद हो गए थे।

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