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यह क्षेत्र बना चर्चा का केंद्र, नोटबंदी से कोई फर्क नहीं, महिलाओं ने कर दिया ऐसा काम

नोटबंदीबांदा। नोटबंदी के चलते उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड में आर्थिक संकट से जूझ रहीं घरेलू महिलाएं ‘क्वर्चा’ से एकत्र किए गए छोटे नोटों से अपनी गृहस्थी संभाल रही हैं। बुंदेलखंड में छोटे नोटों की यह रकम महिलाएं खुद की जरूरतें पूरी करने के लिए जमा किया करती हैं।

केंद्र सरकार द्वारा नोटंबदी के बाद से घरेलू महिलाएं भी आर्थिक संकट से जूझ रही हैं। यहां की घरेलू महिलाएं घर के मुखिया की गैर जानकारी में छोटे नोटों की रकम चोरी-छिपे ‘क्वर्चा’ के रूप में एकत्र किया करती हैं और गांव-देहात में फेरी वालों से खुद के जरूरत के सामान जैसे धोती, कपड़ा और सौंदर्य प्रसाधन के सामान खरीदती हैं, लेकिन नोटों का चलन बंद होने से उत्पन्न आर्थिक संकट से उन्हें घरेलू खर्च चलाने के लाले पड़े हैं। महिलाएं अब गृहस्थी चलाने के लिए अपने क्वर्चा की पोटली खोल चुकी हैं।

बांदा जिले के पनगरा गांव की 85 साल की बुजुर्ग महिला बुधिया ने कहा, “उसने तीन-चार साल के दौरान एक, दो और पांच रुपये के नोट करीब साढ़े सत्रह हजार रुपये क्वर्चा में इकट्ठा किए थे। जब बड़े नोट बंद हो गए तो घर चलाने और खाद-बीज लेने में यही रकम काम आई।” इस महिला ने कहा कि “अब उसके पास दो हजार सात सौ रुपये बचे हैं, जिनसे घर खर्च चल रहा है।”

इसी गांव की महिला देवरतिया ने कहा, “उसके पास क्वर्चा का पांच हजार छह सौ रुपये छोटे नोट थे, जिन्हें बड़े बेटे को दे दिए हैं। इन्हीं नोटों से नमक-तेल की खरीददारी होती है।”

इसी गांव के छोटे दुकानदार नरेंद्र गुप्ता ने कहा, “पहले एक और दो के नोट देखने को नहीं मिलते थे, अब यही नोट खूब मिल रहे हैं।” कुल मिलाकर आर्थिक संकट से जूझ रहीं घरेलू महिलाएं अपने क्वर्चे की पोटली खोल चुकी हैं और इसी रकम से अपनी गृहस्थी संभाल रही हैं।

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