अगले साल तक इलेक्ट्रॉनिक कारोबार 75 अरब डॉलर होने का अनुमान  

इलेक्ट्रॉनिक कारोबारनई दिल्ली। भारत के इलेक्ट्रॉनिक कारोबार के साल 2017 तक 75 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान है और वृद्धि दर 10.1 फीसदी सालाना रहेगी। उपभोक्ता उत्पादों की पैठ बढ़ती जा रही है, विशेष रूप से ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में। ऐसे में एक संयुक्त अध्ययन से सोमवार को यह जानकारी मिली।

इस अध्ययन में बताया गया है, “चीन और ताइवान में बढ़ती लागत के कारण निर्माता अब अपनी फैक्ट्रियां वैकल्पिक बाजारों में लगा रहे हैं। साल 2014 में भारत में मजदूरी की लागत 0.92 डॉलर प्रति घंटा थी, जबकि चीन में यह 3.52 डॉलर प्रति घंटा थी।”

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एसोचैम-ईवाई के संयुक्त अध्ययन, जिसका शीर्षक ‘टर्निग द मेक इन इंडिया ड्रीम इंटू ए रियलटी फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर इंडस्ट्री’ है, में बताया गया है कि इलेक्ट्रॉनिक बाजार में सबसे अधिक इलेक्ट्रोमैनेनिकल पुर्जो की मांग है, जो कुल मांग का करीब 30 फीसदी है।

इसके बाद पैसिव कंपोनेंट की बारी आती है, जिसमें रेसिस्टर और कैपिसीटर शामिल हैं और इसकी बाजार हिस्सेदारी 27 फीसदी है। साल 2015 में भारत का इलेक्ट्रिक पुर्जा उद्योग बढ़कर 13.5 अरब डॉलर का हो चुका है, जोकि साल 013 में 10 अरब डॉलर था।

भारत इस उद्योग के निर्माताओं का पसंदीदा स्थान इसलिए बना हुआ है, क्योंकि यहां मजदूरी की दर बेहद सस्ती है। इस अध्ययन में कहा गया है, “भारत की कर प्रणाली काफी जटिल है, खासतौर से जहां तक अप्रत्यक्ष करों का सवाल है। वर्तमान में भारत में करों की दर से करीब 30 फीसदी है, जबकि अन्य एशियाई देशों में यह 16 से लेकर 25 फीसदी तक है।”

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इसमें आगे कहा गया है, “हालांकि सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने का प्रस्ताव दिया है, ताकि कर व्यवस्था अत्याधुनिक हो सके। लेकिन उद्योग इसकी दरों को लेकर चिंतित है। वे सरकार की तरफ से राजस्व तटस्थ दर रखने को लेकर स्पष्टता चाहते हैं।”

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