सिंडीकेट बैंक में हुआ 1000 करोड़ का घोटाला

phpThumb_generated_thumbnailएजेंसी/सिंडीकेट बैंक में मिलीभगत और फर्जी लेन-देन से करीब 1000 करोड़ का बड़ा घोटाला किया गया। यह काम बैंक के ही आला अधिकारियों ने भू-व्यवसायियों, चार्टर्ड अकाउंटेट व निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर किया। प्रारंभिक जांच में खुलासे के बाद आखिरकार केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मामला दर्ज कर लिया।

साथ ही दिल्ली से आई सीबीआई की टीम ने मंगलवार को जयपुर, उदयपुर व दिल्ली में बैंक की दस शाखाओं पर छापे मारे। उदयपुर में भी मधुवन स्थित बैंक शाखा से टीम ने ऋण संबंधी कागज व कम्प्यूटर से हार्ड डिस्क सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए। अधीनस्थ स्टॉफ से पूछताछ की। सीबीआई व बैंक अधिकारियों ने कार्रवाई को पूरी तरह से गुप्त रखा। इस कार्रवाई से उदयपुर के बैंक ग्राहकों में हड़कम्प मच गया।

सीबीआई ने सिंडीकेट बैंक के फाइनेंस मैनेजर दिल्ली, जयपुर एमआईरोड शाखा के डीजीएम, मालवीय नगर शाखा के एजीएम, उदयपुर के चार्टर्ड अकाउंटेट भरत बम्ब, जयपुर-उदयपुर के तीन निजी व्यक्तियों, निजी कंपनियों और अन्य के खिलाफ भादसं की धारा 409, 420, 467, 468, 471 के अलावा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम 1988 की धारा 13 (2), धारा (1) (सी) (डी ) में मामला दर्ज किया।

यूं किया घोटाला

आरोपितों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी चेक, नकली साख पत्र व एलआईसी पॉलिसी पर ओवरड्राफ्ट लिमिट के जरिए करीब एक हजार करोड़ का घोटाला किया। बैंक अधिकारियों ने बताया कि नकली साख पत्र के तहत देश में लेन-देन होता है तो बैंक एलसी (लेटर ऑफ क्रेडिट) जारी करती है। विदेश से पैसा आता है तो रिजर्व बैंक यह लेटर जारी करता है। लेकिन दोनों ही स्थिति में फर्जी एलसी से ट्रांसपोर्ट से माल छुड़वाकर इधर-उधर कर दिया और इसका पैसा बैंक में जमा ही नहीं हुआ। इसी तरह एलआईसी में बीमा कंपनी अधिकारियों की बिना सहमतिसे ओवरड्राफ्ट से भुगतान कर लिया गया।

जयपुर व उदयपुर में निकले पैसे

सीबीआई की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि धोखाधड़ी का यह खेल सिंडीकेट बैंक की जयपुर व उदयपुर की शाखाओं में वर्ष 2011 के बाद हुआ। बैंक अधिकारियों ने निजी व्यक्तियों व ग्राहकों से सांठगांठ कर नकली चेक व अन्य के जरिए 40 लाख से 5 करोड़ तक की राशि निकाली। इनमें अधिकांश दो से लेकर चार करोड़ तक के सर्वाधिक मामले हैं।

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