#JNU: संघिस्तान बनाम हिंदुस्तान की लड़ाई लड़ने की है जरूरत

kanhaiya_3_647_030416111738_56d9ffb23d312नई दिल्ली : केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार के विरूद्ध दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने संघिस्तान बनाम हिंदुस्तान की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया है। इस मामले में मतभेद को जीवित रखकर सेमिनारों को बाहर निकलकर एकीकृत मोर्चा तैयार करने के एआईएसएफ सदस्य कन्हैया के आह्वान को समर्थन देने की बात कही है। आइसा की सदस्य और जवाहरलाल नेहरू छात्र संघ उपाध्यक्ष शहला राशिद शोरा, डीएसयू के पूर्व नेता उमर खालिद, इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ की अध्यक्ष रिचा सिंह ने कार्यक्रम में कन्हैया के आह्वान का समर्थन भी किया।

उल्लेखनीय है कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विद्यार्थी आॅल इंडिया फेडरेशन, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी माले की छात्र शाखा आॅल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन विभिन्न विचारधारा वाले वामपंथी छात्र संगठन बताए गए हैं। रिचा को निर्दलीय बताया गया है।

दरअसल हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के दलित छात्र रोहित वेमुला के करीबी दोस्त, एचसीयू के विद्यार्थी व आंबेडकर स्टूडेंट ऐसोसिएशन के सदस्य डी प्रशांत प्रतिरोध 2 नामक कार्यक्रम में शामिल हुए। रिचा द्वारा कहा गया कि वैचारिक मतभेद भूलाकर सभी को एक साथ मिलकर कार्य करने की जरूरत है। 

जवाहरलाल नेहरू छात्र संघ अध्यक्ष ने इस मामले में कहा कि गांधी और आंबेडकर को एकजुट करना मुश्किल नहीं होता। आरएसएस की हिंसा के विरूद्ध वे एक साथ खड़े क्यों नहीं होते, उन्होंने कहा कि सेमिनार से निकलकर उनके गांवों तक ये अपनी लड़ाई लड़ेंगे। कन्हैया ने कहा कि एनआईटी में राष्ट्रध्वज और राष्ट्र विरोधी नारेबाजी करने को लेकर जिस तरह की हिंसा हुई उसकी वे निंदा करते हैं।

उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं के परिसरों के भीतर जो युद्ध चल रहा है वह लोकतंत्र के विरूद्ध है। उनका कहना था कि संस्थान परिसरों को युद्ध के मैदान में बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह संस्थागत हिंसा है जो कि लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है। 

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