वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला धांसू फार्मूला, अब प्लास्टिक बैग से बनेंगी स्मार्टफोन की बैटरियां

नई दिल्ली। प्रकृति के नुकसानदायक साबित होने वाले प्लास्टिक बैग्स को उपयोग में लाने का एक नया तरीका ढूंढ लिया गया है। आमतौर पर प्लास्टिक बैग्स को एक बार ही इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसके बाद यह महज एक वेस्ट बनकर ही जमा हो जाता है। लेकिन इस दिशा में विचार करते हुए अमेरिका की पार्ड्यू यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने एक तरीका खोज निकाला है, जिससे वेस्ट प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल स्मार्टफोन की बैटरी बनाने में किया जा सकेगा।

खबरों के मुताबिक़ प्लास्टिक बैग में भारी मात्रा में कार्बन पाया जाता है। लेकिन, इन बैग से शुद्ध कार्बन निकालना काफी जटिल काम होता है, इसलिए रिसर्चरों ने इसका नया और आसान तरीका खोजा है।

रिसर्चरों के मुताबिक, सबसे पहले पॉलीईथीलीन प्लास्टिक के बैग को सल्फ्यूरिक एसिड में डाला और इसके बाद इन्हें एक सॉल्वोथर्मल रिएक्टर के अंदर बंद कर दिया और सामान्य तापमान पर गर्म किया ताकि प्लास्टिक बैग पिघल जाए।

इसके साथ ही पॉलीईथीलीन कार्बन बैकबोन में सल्फोनिक एसिड डाला गया ताकि उससे खतरनाक गैस न निकले और बिना वाष्पीकरण हुए प्लास्टिक को ज्यादा गर्म किया जा सके।

इसके बाद उन्होंने रिएक्टर से सल्फोनेटेड पॉलीईथीलीन को हटा दिया और शुद्ध कार्बन निकालने के लिए इसे भट्टी में गर्म किया। इतना हो जाने के बाद, कार्बन को एक काले पाउडर में डाला गया और इसका इस्तेमाल लिथियम आयन बैटरी के लिए एनोड बनाने में किया। इसके बाद रिसर्चरों ने पाया कि इससे बनी बैटरी भी उसी तरह काम कर रही थी, जिस तरह का काम आम बैटरियां करती हैं।

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बता दें आमतौर पर प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल सिर्फ एक ही बार होता है, जिसके बाद उन्हें फेंक दिया जाता है जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता। लेकिन अब इन्हीं प्लास्टिक बैग से मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में इस्तेमाल होने वाली बैटरियां बनाई जा सकेंगी।

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