बीजेपी की कड़ी आलोचना करने वाली सीएम ‘ममता बनर्जी’ के बारे में जानें कुछ रोचक तथ्‍य

जनता के बीच ‘दीदी’ के नाम से मशहूर ममता बनर्जी बंगाल की 8वीं और वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। ममता बनर्जी 2011 से लगातार बंगाल की सीएम के पद पर आसीन हैं। बंगाल की पहली महिला सीएम का खिताब भी उनके ही नाम है। ममता आज भी दक्षिण कोलकाता के हरीश चटर्जी स्ट्रीट पर स्थित उनके पैतृक निवास में रहती हैं। आज भी भारी बारिश के दौरान पानी भर जाता है।

बीजेपी की कड़ी आलोचना करने वाली सीएम 'ममता बनर्जी' के बारे में जानें कुछ रोचक तथ्‍य

एक बार जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जब उनके घर गए थे तो वो उनकी सादगी देखकर दंग रह गए थे। ममता बनर्जी उस समय रेलवे मंत्री थीं। ममता बनर्जी एक बार फिर देश की राजनीति के केंद्र में आ खड़ी हुई नजर आती हैं। अगर बीजेपी नीत एनडीए सरकार 2019 के लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत लाने में विफल होती है तो ममता भले खुद शीर्ष पद पर आसीन ना हो पाएं लेकिन सत्ता की चाभी की भूमिका निभा सकती हैं। वैसे, ममता बनर्जी के लिए 2018 मिला-जुला रहा।, क्‍योंकि एक ओर देश की राजनीति में जहां उनकी सक्रियता बढ़ी तो दूसरी ओर उनके अपने राज्य में बीजेपी के उत्थान के बाद उनकी चमक थोड़ी सी फीकी पड़ती नजर आई।

पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी की कड़ी आलोचना करने वालों में से एक ममता ने अब तक अपनी छवि ऐसी बनाई है जो सत्तारूढ़ एनडीए को सत्ता से बाहर करने की चाहत रखने वाली विपक्षी पार्टियो को जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। ममता इस साल जनवरी में एक रैली में एक मंच पर 23 विपक्षी पार्टियों के नेताओं को ले आने में सफल रही थीं। वैसे कहा ये जा रहा है कि टीएमसी की सुप्रीमो ममता बनर्जी की नजर दिल्ली की कुर्सी पर है। आइए जानें उनके बारे में कुछ रोचक तथ्‍य।

निजी जीवन और पढ़ाई:

ममता बनर्जी का जन्म 5 जनवरी 1955 को कलकत्ता जो अब कोलकाता है, में एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। ममता का जन्‍म निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। ममता के पिता का नाम प्रोमिलेश्वर बैनर्जी और मां का नाम गायत्री देवी हैं। जब वे बहुत छोटी थीं तभी उनके पिता का निधन हो गया था। पिता के निधन के बाद ममता को जीवन में बहुत कष्‍ट झेलने पड़े और गरीबी का सामना करना पड़ा। इस दौरान उनको दूध भी बेचना पड़ा, क्‍योंकि उनके लिए अपने छोटे भाई-बहनों के पालन-पोषण में अपनी मां की मदद करने का यही अकेला रास्‍ता था। दक्षिण कोलकाता के जोगमाया देवी कॉलेज से इतिहास में ऑनर्स की डिग्री हासिल के बाद उन्‍होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से इस्लामिक इतिहास में मास्टर डिग्री हासिल की। वहीं, श्रीशिक्षायतन कॉलेज से उन्होंने बी.एड. की डिग्री भी हासिल की। साथ ही, उन्होंने कोलकाता के जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से कानून में डिग्री प्राप्‍त की हैं।

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राजनीतिक जीवन की शुरूआत और सफर:

ममता बनर्जी का राजनीतिक जीवन 15 साल की उम्र में ही शुरू हो गया था। अपने स्कूली दिनों से ही ममता को राजनीति में रूची थीं और इसी कारण लम्बे समय तक वह कांग्रेस से जुड़ी रहीं। सत्तर के दशक में जब वह कॉलेज में पढ़ ही रही थीं तभी उन्हें राज्य महिला कांग्रेस का महासचिव भी बनाया गया था। मुसीबत के उन दिनों ने ममता को मजबूत बना किया और उन्होंने पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्टों को सत्ता से हटाने की कसम खाई।

ममता का राजनीतिक सफर 1970 में शुरू हुआ, जब वे कांग्रेस पार्टी की कार्यकर्ता बनीं। 1976 से 1980 तक वे महिला कांग्रेस की महासचिव रहीं। 1984 में ममता ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता सोमनाथ चटर्जी को जादवपुर लोकसभा सीट से हराया। उन्हें देश की सबसे युवा सांसद बनने का गौरव भी प्राप्त हैं। उन्हें अखिल भारतीय युवा कांग्रेस का महासचिव बनाया गया। मगर 1989 में कांग्रेस विरोधी लहर के कारण जादवपुर लोकसभा सीट पर ममता को मालिनी भट्टाचार्य के खिलाफ हारना पड़ा। 1991 का चुनाव उन्होंने कलकत्ता दक्षिण संसदीय सीट से लड़ा और जीता भी।

उन्होंने दक्षिणी कोलकाता लोकसभा सीट से माकपा के बिप्लव दासगुप्ता को पराजित किया और साल 1996, 1998, 1999, 2004 और 2009 में वह इसी सीट से लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुईं। 1991 में कोलकाता से लोकसभा के लिए चुनी गईं। नरसिम्हा राव सरकार में मानव संसाधन विकास, युवा मामलों और महिला एवं बाल विकास विभाग में राज्यमंत्री बनीं। नरसिम्हां राव सरकार में खेल मंत्री बनाई गईं। 1993 में उन्हें इस मंत्रालय से छुट्‍टी दे दी गई। अप्रैल 1996 में उन्होंने कांग्रेस पर बंगाल में माकपा की कठपुतली होने का आरोप लगाया। इसके अगले ही साल 1997 में उन्होंने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस बनाई और खुद पार्टी की अध्यक्ष बनीं। साल 1999 में उनकी पार्टी बीजेपी के नेतृत्व में बनी एनडीए सरकार का हिस्सा बन गई और उन्हें रेलमंत्री बना दिया गया। उन्‍होंने साल 2002 में उन्होंने अपना पहला रेल बजट पेश किया था। 2011 के राज्य विधानसभा चुनावों में उन्होंने माकपा और वामपंथी दलों की सरकार को 34 सालों के लगातार शासन के बाद उखाड़ फेंका था।

पहली महिला मंत्री का खिताब:

इससे पहले वे केन्द्र में दो बार रेलमंत्री बन चुकी हैं और पहली महिला रेलमंत्री बनने का खिताब उनके नाम हैं। वे केन्द्र में कोयला, मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री, युवा मामलों और खेल और महिला और बाल विकास की राज्यमंत्री भी रह चुकी हैं। उनकी उपलब्धियों के लिए साल 2012 में टाइम पत्रिका ने उन्हें विश्व के 100 प्रभावी लोगों की सूची में स्थान दिया था।

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क्या-क्या रहीं ममता:

राजनीति में आने से पहले ममता बनर्जी स्टेनोग्राफर से लेकर ट्यूटर और स्कूल टीचर से लेकर प्राइमरी टीचर का काम कर चुकी हैं।

उनकी पसंद, ना पसंद:

ममता ने शादी नहीं कीं और वह सादा जीवन जीने में विश्‍वास करती हैं और उनको हमेशा ही  एकरंगा बार्डर वाली तांत की साड़ी पहनना ही पसंद हैं। उन्हें ज्वेलरी पहनना या मेकअप करना पसंद नहीं। उनके कंधे पर आमतौर पर एक सूती थैला लटका नजर आता है जो कि उनकी पहचान बन गया है।

ममता बनर्जी को संगीत से खासा लगाव है और इन्होंने एक बार कोलकाता में ट्रैफिक लाइट पर रवींद्र संगीत पेश किया था।

ममता बनर्जी एक लेखिका भी है। अबतक वे कविता, निबंध और उपन्यासों के कई संस्करणों के लिख चुकी हैं। वह एक अच्छी चित्रकार भी है।

ममता को खाने में क्‍या है पसंद:

ममता बनर्जी अपने सेहत का खासा ध्यान रखती हैं और रोजाना 5 से 6 किलोमीटर पैदल चलती हैं। ममता अपने खाने का बहुत ध्‍यान रखती हैं और तेल और मसालेदार खानों से परहेज करती हैं। उनको पांरपरिक बंगाली खाना बहुत पसंद है।

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