यहां स्थित है शिवलिंग से लिपटे शेषनाग, जहां घायल होकर गिरा था जटायू

नई दिल्ली। भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो अपने आप में एक रहस्य हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बता रहे हैं। यह मंदिर Andhra Pradesh में स्थित है।

दरअसल प्रदेश के अनंतपुर जिले में एक गांव है लेपाक्षी। कहा जाता है कि लेपाक्षी वही पौराणिक स्थान है जहां रामायण काल में रावण से युद्ध के बाद जटायु घायल हो कर गिरा था।

वर्तमान में यह गांव लेपाक्षी मंदिर के लिए विख्यात है। यह विशाल मंदिर भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान वीरभद्र को समर्पित है। वीरभद्र को शिव का ही एक रूप माना जाता है। अनेक लोगों का मानना है कि लेपाक्षी रामायण कालीन गांव है। कहते हैं, जब लंकापति रावण भगवान राम की भार्या सीता का हरण कर ले जा रहा था, तब जटायु ने उससे युद्ध किया था।

स्थानीय लोग कहते हैं कि युद्ध में घायल होकर जटायु यहीं गिरा था। वह भगवान राम को घायलावस्था में यहीं मिला था। जख्मी जटायु को देखकर उन्होंने कहा था, हे पक्षी उठो! उल्लेखनीय है कि तेलुगु में ‘ले पाक्षी’ का भी यही अर्थ है: उठो, पक्षी!

लेपाक्षी मंदिर 70 पिलर (खंभा) पर खड़ा एक निहायत कलात्मक और खूबसूरत मंदिर है। इसके 70 वजनदार खंभों में एक खंभा ऐसा भी है, जो जमीन को नहीं छूता है, बल्कि हवा में लटका हुआ है। इस एक झूलते हुए पिलर के कारण यह मंदिर ‘हैंगिंग टेम्पल’ कहलाता है। ब्रिटिश शासनकाल में कई अंग्रेज़ आर्किटेक्ट ने इस पिलर के हवा में झूलने का रहस्य जानने की कोशिश की, लेकिन वे कभी सफल नहीं हो पाए। आज भी यह एक रहस्य ही है।

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लेपाक्षी मंदिर आने वाले श्रद्धालु इस पिलर के नीचे की खाली जगह से आरपार कपड़ा सरकाते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि इसके नीचे से कपड़ा निकालने से सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी होती है।

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