भारत में वाहन एलपीजी के इस्तेमाल को लेकर आईएसी ने जारी की ये रिपोर्ट

नयी दिल्ली। वाहन एलपीजी उद्योग के संगठन इंडियन ऑटो एलपीजी कोएलिशन (आईएसी) ने का कहना है कि दुनिया में पेट्रोल और डीजल के बाद वाहन ईंधन के तौर पर एलपीजी सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है पर स्वच्छ ईंधन के रूप में भारत में इसको प्रोत्साहित करने की जरूरत है।

संगठन का कहना है कि वाहन एलपीजी के उपयोग में भारत दूसरे देशों से काफी पीछे है।

आईएसी के महानिदेशक सुयश गुप्ता ने एक विज्ञप्ति में कहा, ‘‘ एनडीए सरकार ने पिछले पांच वर्ष के अपने कार्यकाल में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा दिया है। उज्ज्वला योजना ने घरेलू एलपीजी कनेक्शनों को 2014 के 55% के मुकाबले अब 90% से भी अधिक घरों तक पहुंचाया है। हम नई सरकार से इसी प्रकार का कोई अभियान स्वच्छ ईंधन चालित परिवहन क्षेत्र के लिए भी लाने की अपील करते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ कुछ ऐसी योजनाएं लागू की जानी चाहिए जो ऑटो एलपीजी जैसे पर्यावरण अनुकूल ईंधन को बढ़ावा दे। इससे शहरी भारत की वायु गुणवत्ता में तुरंत सुधार लाया जा सकता है।’’

विज्ञप्ति के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 में देश में 4,21,000 टन ऑटो एलपीजी की बिक्री हुई। हर साल 2.3 करोड़ टन एलपीजी की खपत के साथ भारत इस ईंधन के इस्तेमाल में दुनिया में दूसरे स्थान पर है। इसके बावजूद भारत ऑटो एलपीजी के इस्तेमाल के मामले में काफी पीछे है।

दुनियाभर में 2.6 करोड़ से भी अधिक गाड़ियां ऑटो एलपीजी से चल रही हैं। इनके लिए करीब 71,000 एलपीजी फिलिंग स्टेशन हैं। दुनिया में ऑटो एलपीजी की कुल खपत 2.7 करोड़ टन है। ऑटो एलपीजी के इस्तेमाल में दक्षिण कोरिया दुनिया में सबसे आगे है। तुर्की, पोलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जापान, इटली, मेक्सिको, अमेरिका, रूस, और चीन जैसे कई अन्य देशों ने भी बेहद सफलतापूर्वक ऑटो एलपीजी को अपनी यातायात संबंधी जरूरतों के लिए अपनाया है।

आईएसी के अनुसार नई सरकार को नीति के स्तर पर कई कदम उठाने की जरूरत है ताकि अगले एक दशक के भीतर पर्यावरण के अनुकूल ऑटो एलपीजी को एक वैकल्पिक ईंधन के रूप में बड़े पैमाने पर स्वीकार्यता मिल सके।

उल्लेखनीय है कि वाहन क्षेत्र से जुड़े संगठन सियाम ने हाल में ‘वाहनों के लिए वैकल्पिक ईंधन’ विषय पर श्वेत पत्र में कहा कि ऊर्जा सुरक्षा एवं पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए भारत को ई-वाहन के साथ वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के लिए भी कदम उठाने चाहिए।

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उसने कहा है कि नीतिगत प्रयासों एवं बुनियादी ढांचा के विकास के जरिए सरकार के ईंधन के विविधिकरण के प्रयासों को बल मिलेगा। उसका सुझाव है कि वाहन उद्योग को वैकल्पिक ईंधन पर चलने वाले वाहनों के प्रसार का लक्ष्य रखकर काम करना चाहिए।

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