भारत का सबसे खूबसूरत सूर्योदय और सूर्यास्त, स्वामी विवेकानंद के ध्यान की धरती

खूबसूरत शहर तमिलनाडु के कन्याकुमारी को केप कोमोरन के नाम से जाना जाता था। शहर का नाम देवी कन्या कुमारी के नाम पर पड़ा है, जिन्हें भगवान कृष्ण की बहन माना गया है। यह जगह चोला, चेरा, पण्ड्या और नायका राज्यों का घर रहा है। कला और धर्म-संस्कृति का पुराना गढ़ है। स्वामी विवेकानंद की इस धरती पर सबसे खूबसूरत दिखने वाला सूर्योदय और सूर्यास्त दिखाई देता है।

सुबह हर होटल की छत पर पर्यटकों की भारी भीड़ सूरज की अगवानी के लिए जमा हो जाती है। शाम को अरब सागर में डूबते सूरज को देखना भी यादगार होता है। कन्याकुमारी में तीन समुद्रों- बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और हिन्द महासागर का मिलन होता है। इस स्थान को त्रिवेणी संगम भी कहा जाता है। यहां ज्यादातर टूरिस्ट प्लेसेस आसपास ही हैं। फैमिली के साथ क्रिसमस और न्यू ईयर की छुटिट्यों को एंज्वॉय करने का प्लान बना रहे हैं तो कन्याकुमारी एक बेहतरीन ट्रिप है।

समुद्र के बीच स्थित इसी जगह पर स्वामी विवेकानंद ने ध्यान लगाया था। यहां उनकी विशाल आदमकद मूर्ति है। यहां से समुद्र का शानदार नीला नजारा नजर आता है। इसी के पास एक दूसरी चट्टान पर तमिल के संत कवि तिरूवल्लुवर की 133 फीट ऊंची मूर्ति है। इसे थिरुवल्लूवर स्टेच्यू के नाम से भी जाना जाता है।

यहां तट पर कांचीपुरम की श्री कांची कामकोटि पीठ का एक द्वार और शंकराचार्य का एक छोटा-सा मंदिर है। यहीं पर 12 स्तंभों वाला एक मंडप भी है जहां बैठकर यात्री धार्मिक कर्मकांड किए जाते हैं।

यहां पर कुमारी अम्मन देवी का मंदिर है, जहां देवी पार्वती के कन्या रूप को पूजा जाता है। मंदिर 3000 साल से भी पुराना है। यह पहला दुर्गा मंदिर है, जिसे खुद भगवान परशुराम ने स्थापित किया था।

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महात्मा गांधी की मृत्यु के बाद उनके अस्थि-अवशेषों को कई कलशों में भरकर देशभर की पवित्र नदियों में प्रवाहित किया गया था, उनमें से एक कलश यहां पर रखा गया था। इसकी संरचना मंदिर, मस्जिद और चर्च के आकार वाली है।

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