भाजपा पार्टी की ताकत थे अरुण जेटली, हमेशा खलेगी कमी

पूर्व विर्त मंत्री अब हम सभी के बीच नहीं हैं लेकिन वह आज भी हम सभी के दिल में रहते हैं. जेटली के जाने का सबसे बड़ा झटका भाजपा को हुआ है क्योंकि वह सिर्फ एक नेता नहीं थे, वह पूरी पार्टी को जोड़कर रखते थे. 2014 में भाजपा की सरकार जिस तरह से सामने आई उसमे जेटली की एक अहम भूमिका थी.

भाजपा पार्टी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को हर सियासी तूफान से बचाने वाले भी जेटली ही थे. फिलहाल के सियासी दौर में मोदी-शाह की जोड़ी तोड़ने वाला दूर-दूर तक नहीं है. ऐसे में जेटली का अलविदा कह देना पार्टी के साथ मोदी-शाह के लिए बड़ा नुकसान है.

लोकसभा चुनाव हार गए थे, लेकिन मंच के मुखर नेता थे जेटली

अरुण जेटली भले ही लोकसभा चुनाव हार गए थे, हमेशा राज्यसभा से चुने जाते थे लेकिन पार्टी में उनका कद बहुत बड़ा था. पार्टी की नीतियों और विचारधारा को वह किसी भी मंच से मुखर होकर रखते थे. 2014 में मोदी लहर के बावजूद लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी जेटली को वित्त मंत्रालय जैसा विभाग मिला. उन्होंने जो काम किए उसे पार्टी आगे भी भुनाती रहेगी. नोटबंदी और जीएसटी का फैसला जेटली के वित्त मंत्री रहते हुए ही लिया गया था. इन दो फैसलों की जब भी चर्चा होगी जेटली को याद किया जाएगा.

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संकट में दिया मोदी-शाह का साथ

अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का तब साथ दिया जब उन्हें गुजरात से बाहर कर दिया गया था. इस दौरान अमित शाह जेटली के साथ अक्सर देखे जाते थे. गुजरात दंगों के बाद तत्‍कालीन सीएम नरेंद्र मोदी की कानूनी दिक्कतें दूर करने की जिम्मेदारी भी जेटली ने ही संभाली थी. पार्टी में भी मोदी के खिलाफ तीखे हमले हो रहे थे, उस दौरान भी जेटली ने मोदी का ही साथ दिया. मोदी को 2014 में भाजपा के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर जेटली ने ही पार्टी के बड़े-बड़े दिग्गजों को मनाया था. इसके लिए जेटली ने राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान और नितिन गडकरी को साथ लाने का काम किया था.

तीन तलाक पर खुलकर सामने आए थे जेटली

तीन तलाक मामले की पहल करने वाले अरुण जेटली ही थे. इस बड़े मुद्दे पर सरकार की स्थिति जेटली ने ही स्पष्ट की थी. मोदी सरकार पहली बार सत्ता में आने के बाद से ही तीन तलाक बिल को पारित कराने की कोशिश में जुटी थी. राज्यसभा के बाद 30 जुलाई 2019 को यह बिल लोकसभा से भी पास हो गया था.

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बीजेपी के ब्रेन माने जाते थे

वाजपेयी सरकार में अरुण जेटली को कानून एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण और विनिवेश मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया था. अटल बिहारी वाजपेयी के सबसे भरोसेमंद लोगों में से जेटली एक थे. उस दौर में अरुण जेटली और अनंत कुमार को ही बीजेपी का ब्रेन माना जाता था. हालांकि अब पार्टी के पास दोनों ही नेता नहीं हैं.

 

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