क्या आपने कभी भी भागलपुर के इतिहास के बारे में जानने की कोशिश की, अगर नहीं तो पेश है कुछ रोचक बातें

बिहार की राजधानी पटना से 220 किमी दूर गंगा नदी के तट पर बसा ऐतिहासिक शहर है भागलपुर। क्‍या आप जानते हैं कि इस शहर का ये नाम कैसे पड़ा? ‘भागदत्तपुरम का मतलब होता है भाग्‍य (गुडलक) का शहर। इस शहर में हिंदी भाषा बोली जाती है और जबकि यहां की क्षेत्रीय भाषा अंगिका है।

भागलपुर के इतिहास

दुनियाभर में तकरीबन 50 मिलिनय लोग इस भाषा का प्रयोग करते हैं और ये काफी प्रसिद्ध भाषा है। भागलपुर को देश के प्रमुख सिल्‍क उत्‍पादक के रूप में जाना जाता है औश्र इस शहर की जनसंख्‍या लगभग 350,000 है। यहां आपको चीनी और चावल की खूब मिलें दिख जाएंगी।

रामायण और महाभारत के सीरियल और फिल्‍मों में आपने भागलपुर शहर को देखा होगा। इस शहर पर कभी अंगा राजवंश का शासन हुआ करता था जिसके राजा कर्ण थे। आइए जानते हैं पौराणिक और ऐतिहासिक महत्‍व रखने वाले इस शहर के बारे में।
भागलपुर का इतिहास
अगर आपको भी पौराणिक कथाएं पसंद हैं तो आपने मंदार पर्वत के बारे में तो सुना ही होगा। ये पर्वत भागलपुर से दक्षिण की ओर 52 किमी दूर स्थित है। मंदार पर्वत के बारे में एक बहुत ही दिलचस्‍प पौराणिक कथा प्रचलित है। राक्षसों और देवताओं के बीच हुए समुद्र मंथन के दौरान इसी पर्वत से मंथन किया गया था।

इस पर्वत पर वासुकि नामक सर्प को बांधकर समुद्र मंथन किया गया था जिसके बाद अमृत की प्राप्‍ति हुई थी। चीनी यात्री फा हेइन और हेउन त्‍सांग ने भागलपुर को पूर्वी भारत का सबसे बड़ा व्‍यापारिक केंद्र बताया है। गंगा नदी की शरण में बसे भागलपुर से ही दक्षिण एशिया की पहली महिला डॉक्‍टर कादंबिनी थी।

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कैसे पहुंचे भागलपुर
वायु मार्ग: भागलपुर से 235 किमी दूर पटना में घरेलू हवाई अड्डा स्थित है। प्रमुख एयरलाइंस द्वारा ये हवाई अड्डा भारत के कई मुख्‍य शहरों से जुड़ा हुआ है। रेल मार्ग: यह पूर्वी रेलवे में किउल से बर्दवान तक फैला है।

इसके प्रमुख स्‍टेशनों में सुल्‍तानगंज, भागलपुर, कहलगांव और सबोर हैं। सड़क मार्ग: भागलपुर राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। एनएच 31 भागलपुर जिले के नवगछिया उप-मंडल से होकर गुजरता है। यह बेगूसराय और खगड़िया से गुजरते हुए सीधे पटना से जोड़ता है।
भागलपुर के दर्शनीय स्‍थल
विक्रमशिला
शानदार विश्‍वविद्यालय विक्रमशिला को बिहार का गौरव भी कहा जाता है। ये भागलपुर से 38 किमी दूर है और यहां पर आपको बौद्धिक इतिहास के बारे में भी जानने को मिलेगा। फा हेइन और हिउन त्‍सांग ने अपने शास्‍त्रों में इस जगह का वर्णन किया है। इतिहास के जो आकर्षक अवशेष कहीं भी मिलना मुश्किल हैं, वो यहां पर मौजूद हैं।

पर्यटन

विद्वानों और शिक्षार्थियों को आज भी विक्रमशिला खूब आकर्षित करता है। यहां की सबसे खास बात है इसका विक्रमशिला महोत्‍वस। इस महोत्‍सव का आयोजन फरवरी में होती है जिसमें गंगा नदी में नावें तैरती हुईं दिखती हैं। ये नज़ारा बहुत अद्भुत होता है।
कोलगंज रॉक कट मंदिर
पांचवी और छठी शताब्‍दी के गुप्‍त राजवंश के शासनकाल से संबंधित है कोलगंज मंदिर। इस मंदिर को चट्टान को काटकर बनाया गया है और ये देखने में बहुत ही खूबसूरत और अद्भुत मंदिर है। इस मंदिर का सबसे प्रमुख आकर्षण बौद्ध, जैन और हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों का संग्रह है। प्राचीन भारत की चट्टानों को काटकर बनाई गई नक्‍काशियों का अध्‍ययन करने के लिए विदेशी आर्कियोलॉजिकल एक्‍सपर्ट इस मंदिर की ओर आ‍कर्षित होते हैं।

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सुल्‍तानगंज
भागलपुर से पश्चिम में 28 किमी की दूरी पर गंगा नदी है और इसी के साथ स्‍थित है सुल्‍तानगंज। जुलाई और अगस्‍त के महीनों में सबसे ज्‍यादा श्रद्धालु यहां बहने वाली गंगा नदी में डुबकी लगाने आते हैं। सुल्‍तानगंज से देवघर का 80 किमी लंबा काफी दिलचस्‍प ट्रैक है।

देवघर में स्थित भगवान बैद्यनाथ के मंदिर के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु नंगे पांव यात्रा करते हैं। यहां पर बाबा अजगैबिनाथ मंदिर भी‍ स्थित है जो कि चट्टान को काटकर बनाई गई नक्‍काशियों के लिए प्रसिद्ध है। क्या आप इंग्लैंड के बर्मिंघम सिटी संग्रहालय में संरक्षित सबसे शानदार प्रतिमा के बारे में जानते हैं? यह एक स्‍तूप है जिसमें अभय मुद्रा में बुद्ध की कांस्य प्रतिमा स्‍थापित है।
कूप्‍पा घाट
कूप्‍पा का मतलब होता है गुफा और घाट का मतलब होता है नदी के तट पर स्थित। कूप्‍पा घाट की ही गुफाओं में महर्षि मेहि ने कुछ महीनों तक ‘योग ऑफ इनर साउंड’ का अभ्‍यास किया था। आज इस गुफा को शानदार आश्रम में तब्‍दील कर दिया गया है।

अब से जगह बगीचे, मूर्तियां, नक्‍काशियां और पौराणिक महत्‍व रखने वाली बातों से सजी हुई है। इस आश्रम में ऐ गुप्‍त मार्ग भी है जोकि कई स्‍थानों तब जाता है। शांतिमय वातावरण में कुछ समय बिताने के लिए श्रद्धालु यहां आते हैं। गुरु पूर्णिमा जैसे अवसरों पर तो यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
खनकाह ए शाहबजिया
भागलपुर रेलवे स्‍टेशन के पास स्थित इस शानदार जगह को देखने के लिए हर धर्म और जाति के लोग यहां आते हैं। इस विशाल मस्जिद का निर्माण औंरगजेब ने करवाया था। अल्‍लाह के 40 सूफियों में से एक सूफी शाहबाज़ रहमुत्‍तलाह का पवित्र स्‍थान भी यहां स्थित है।

हर गुरुवार को यहां पर श्रद्धालुओं की भीड़ी लगती है। भारत और बांग्‍लादेश समेत कई देशों से श्रद्धालु यहां अपनी दुआओं को कबूल करवाने आते हैं। यहां पर स्थित तालाब के पानी को औषधीय गुणों से युक्‍त माना जाता है। ये कई बीमारियों और सांप के ज़हर को उतार सकता है। इस जगह की बेसमेंट से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को सदियों पुरानी पांडुलिपियां मिली थीं।

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