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मिल गया प्रदूषण को खत्म करने का सबसे सटीक तरीका

प्रदूषण का स्तरलखनऊ। देश में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। पर्यावरण से जुड़ी रिपोर्टो पर नजर डालें तो देश में प्रदूषण बढ़ने से उसके दुष्प्रभाव भी नजर आने लगे हैं। बीते वर्षो में वायु गुणवत्ता लगातार खराब हुई है, लेकिन इसे सौर ऊर्जा, वायु ऊर्जा व नाभिकीय ऊर्जा के इस्तेमाल से रोका जा सकता है क्योंकि इसी ऊर्जा में प्रदूषण से लड़ने का दम है। यह बात अमेरिका के यूनिवर्सिटी आफ कैलिफोर्निया बर्कले के पूर्व प्रोफेसर रिचर्ड ए मुलर ने आइआइटी में कहीं।

सल्फर ऑक्साइड, नाइट्रोजन और कार्बन खासकर पीएम 2.5 जैसे वायु प्रदूषक तत्वों को मौत का पांचवां सबसे बड़ा कारण माना जाता है। वायु प्रदूषण के कारण दिल की बीमारी से जुड़े खतरे भी बढ़ जाते हैं।

प्रदूषण का कारण कोयला, बायोमास, पेट्रोलियम व नेचुरल गैस हैं। भारत में 44 फीसद कोयला, 22 फीसद बायोमास, 22 फीसद पेट्रोलियम पदार्थ व सात फीसद प्रदूषण नेचुरल गैस से फैलता है। दिल्ली का उदाहरण देते हुए प्रो. मुलर ने बताया कि दीपावली के बाद जब वहां वायु प्रदूषण का स्तर जांचा गया तो बहुत अधिक निकला। चीन और भारत दोनों ही विकासशील देश हैं और दोनों में ही प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है, लेकिन विंड एनर्जी की ओर चीन तेजी से बढ़ रहा है। वहां पर इसके 32 प्लांट बन रहे हैं। इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए ऊर्जा का इस्तेमाल करने की भी यहां जरूरत है। इस मौके पर निदेशक प्रो. इंद्रानिल मन्ना के अलावा प्रो. एआर हरीश समेत अन्य शिक्षक व छात्र मौजूद थे।

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