उम्र 82 साल, रोज दो बार चढ़ती है पहाड़

एजेन्सी/  old-lady-1459675729यदि आप 82 साल के हों तो क्या पहाड़ चढ़ पाएंगे? शायद नहीं। लेकिन, लक्ष्मी रोजाना दो बार चढ़ती हैं। पहले गुंथा हुआ आधा किलो आटा लेकर। फिर पहाड़ के उस पार उसे बेचने से मिले पैसे लेकर। इसी से लक्ष्मी का घर चलता है, बीमार बेटे के लिए दवा आती है।

लक्ष्मी खेड़ी गेट स्थित मीणों की ढाणी में रहती हैं। रोजाना सुबह 9 बजे घर से निकलती हैं और आमेर स्थित पर्यटन स्थल बड़ा सागर पहुंचती हैं। वहां भ्रमणार्थियों को गुंथा हुआ आटा बेचती हैं, जो इसे मछलियों को खिलाते हैं। इससे लक्ष्मी को कभी 80 तो कभी 100 रुपए मिल जाते हैं।

पकड़ी पहाड़ की राह

लक्ष्मी ने बताया, उसके तीन बच्चों और पति की मौत हो चुकी है। एक बेटा उसके साथ रहता है, जो अक्सर बीमार रहने के कारण काम पर नहीं जा पाता। दूसरा बेटा उसके परिवार के साथ अलग रहता है। अपना और बीमार बेटे का पेट पालने के लिए उसे ही मेहनत-मशक्कत करनी पड़ती है। सड़क से आना-जाना दूर पड़ता है इसलिए रोजाना पहाड़ के रास्ते आती-जाती हैं।

लक्ष्मी के अनुसार पर्यटकों की चहल-पहल के समय उसे दिनभर में 200 रुपए तक मिल जाते हैं। गर्मियों में कम लोग बड़ा सागर पहुंचते हैं। आटा बिक नहीं पाता, जिससे बेटे के लिए दवा लाना तो दूर,कई बार घर में चूल्हा तक नहीं जलता।

उठा ही ले भगवान

लक्ष्मी ने बताया, लकड़ी के सहारे पहाड़ चढऩे-उतरने के दौरान गिरने का खतरा तो रहता है, प्रार्थना भी करती हंू भगवान मुझे ‘उठा’ नहीं रहा।

सरकार से मदद नहीं

लक्ष्मी के पास राशन कार्ड, पहचान पत्र जैसे दस्तावेज तो हैं लेकिन सरकार से सहायता नहीं मिलती। तहसील कार्यालय के कई चक्कर काटे लेकिन पेंशन चालू नहीं हुई।

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