“निजी स्कूलों द्वारा किया जा रहा अभिभावकों का शोषण”-योगेश

download (13)-आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने सीएम को सम्बोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को सौंपा

सीतापुर। शिक्षा के बाजारीकरण के अंर्तगत निजी स्कूलों द्वारा किये जा
रहे अभिभावकों के शोषण के विरोध में मंगलवार को आम आदमी पार्टी ने
मुख्यमंत्री को सम्बोधित दस सूत्रीय ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से आम आदमी पार्टी ने मांग कि नये शिक्षा सत्र 2016-17
में जहां एक ओर पूरे प्रदेश में सरकारी स्कूलों की बदहाली के चलते
अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने और अच्छे भविष्य की उम्मीद
में निजी स्कूलों की शरण में जाने को विवश हैं। वहीं दूसरी ओर प्रदेश भर
में इन्हीं निजी स्कूलों के द्वारा मजबूर और लाचार अभिभावकों का जमकर
शोषण किया जा रहा है। स्कूल माफिया अभिभावकों को सत्र के प्रथम दिन वह
लिस्ट पकड़ा देते हैं। जिसमें बच्चों की स्टेशनरी, ड्रेस, जूते, मोजे आदि
सामान इन्हीं स्कूलों के द्वारा तय की गयी दुकानों से खरीदने की बाध्यता
होती है। शिक्षा माफिया और इन तय दुकानों के गठजोड के चलते अभिभावकों से
दोगुना चैगुना मूल्य वसूला जाता है। स्कूलों द्वारा प्रतिवर्ष मनमाने
तरीके से फीस वृद्धि कर दी जाती है। जिससे मध्यम वर्गीय और निम्नवर्गीय
अभिभावकों की कमर टूट जाती है। शिक्षा विभाग और शासन प्रशासन इन कमीशनखोर
और लूट एवं डकैती का पर्याय बन चुके स्कूलों की कारगुजारियों से अवगत
होते हुए भी मौन है। जबकि सीबीएसई एवं एनसीईआरटी के मानको के अनुसार ये
साफ हिदायत है कि कोई भी स्कूल किसी भी रूप में कैपिटेशन या डोनेशन फीस
नहीं ले सकता। ऐसा करने वाले स्कूल की मान्यता रद्द करने और वसूले गये
पैसे का दस गुना जुर्माने का प्रावधान है। आरटीई 2009 के अंतर्गत निजी
स्कूलों मे गरीब बच्चों के निःशुल्क शिक्षा हेतु 25 प्रतिशत सीट आरक्षित
है। परन्तु प्रदेश सरकार इस मामले में भी प्रदेश वासियों को ठेंगा दिखाते
और प्रदेश के नौनिहालों के भविष्य की दुश्मन बनी नजर आती है। आम आदमी
पार्टी ने कहा कि यदि उपरोक्त मांगे शीघ्र न मानी गयी तो आप कार्यकर्ता
आगामी दिनों में सड़को पर उतरने को बाध्य होंगे। इस मौके पर जिला संयोजक
योगेश राज, जिला सचिव आशुतोष बाजपेयी, मीना राजवंशी, संजय मिश्र, नारायण
स्वरूप शुक्ला, सुरेश चन्द्र कनौजिया, नीरज मिश्र, राजू, मुनेन्द्र, मो0
कलीम, तौफीक गाजी सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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