तुर्की में यूए के लिए जासूसी करने का मामला आया सामने, संदेह में 1 शख्स हुआ गिरफ्तार

तुर्की में यूएई (UAE) के लिए जासूसी करने का मामला सामने आया है। तुर्की के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि तुर्की खुफिया विभाग ने संयुक्त अरब अमीरात की ओर से अरब असंतुष्टों पर जासूसी करने के संदेह में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। अभी संदिग्ध की पहचान नहीं हो पाई है। तुर्की के अधिकारी ने न्यूज एजेंसी एपी को बताया कि इस संदिग्ध जासूस ने तुर्की में प्रवासी अरब असंतुष्ट (Arab dissident) और पत्रकार समूहों (journalist groups) में घुसपैठ की थी।

रिपोर्ट ने बताया कि उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात के अलावा एक अरब देश के पासपोर्ट का उपयोग करके तुर्की की यात्रा की।अधिकारी ने कहा कि बताया कि जासूस ने कथित तौर पर अरब नागरिकों पर जासूसी करने की बात स्वीकार कर ली है।

बता दें कि इससे पहले 23 जून 2020 को फ्रास के लिए जासूसी करने वाले चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। यह चार लोग रूढ़िवादी संगठनों, धार्मिक समहूों और तुर्की के धार्मिक मामलों के निदेशालय और इसके कर्मचारियों के बारे जानकारी इकट्ठा कर रहे थे। रिपोर्ट के मुतबिक, इन पांच लोगों के पास फर्जी पहचान पत्र भी थे। जो नेशनल इंटेलिजेंस ऑर्गोनाइजेशन से कथित तौर पर संबंधित थे और ये लोग इस्सलामिक स्टेट और इस तरह के अन्य समूहों के बारे में जानकारी जुटा रहे थे।

गौरतलब है कि कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करने वाले तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप एर्दोगन(Recep Tayyip Erdogan) ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर

 का मुद्दा उठाया था। एर्दोगन के इस रुख पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए तुर्की को करारा जवाब दिया था। भारत ने कहा है कि तुर्की के राष्ट्रपति भारत के आंतरिक मामलों में दखल दे रहे हैं जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है। भारत ने नसीहत देते हुए कहा था कि कश्मीर जैसे गंभीर मसले पर बयान देने से पहले तुर्की को अपनी नीतियों की गहराई से समीक्षा करनी चाहिए

एर्दोगन द्वारा संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दे को हवा देने के बाद ट्विटर पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, टीएस तिरुमूर्ति ने कहा था कि तुर्की को अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करना सीखना चाहिए और इसकी और अधिक गहराई से समीक्षा करना चाहिए।

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