ताश के पत्तों से जानेंअपना भविष्य, स्वभाव, फायदे और नुकसान

आपने ताश के जादू जरूर देखें होंगे लेकिन ताश से स्वभाव और भविष्य जानने के बारे में कम ही सुना होगा। यह विद्या तोते द्वारा निकाले गए ताश के पत्तों की तरह नहीं है और ना ही टेरो कार्ड की तरह है। तब कैसे जान सकते हैं इसके बारे में हम खुद का भविष्य और आने वाले अच्छे और बुरे दिनों के बारे में? कुछ लोग कहते हैं कि इससे भविष्य या अन्य बातों का जानना एक मनोरंजन मात्र है। हालांकि बहुत से लोग इसमें विश्‍वास भी करते हैं। खैर, जानते हैं कि यह कैसी विद्या है और आप कैसे अपना भविष्य जान सकते हैं?

ताश के पत्तों

ताश के 52 पत्तें हैं 52 सप्ताह-
भारतीय ज्योतिषियों के अनुसार 1 साल के अंदर 52 सप्ताह होते हैं और 4 ऋतुएं। इसी आधार पर ताश के पत्तों का निर्माण किया गया हैं। 52 सप्ताह को यदि 4 भागों में विभाजित किया जाए तो एक भाग में 13 दिन आएंगे। भारतीय मान्यता के अनुसार एक भाग में धर्म, दूसरे में अर्थ, तीसरे में काम और चौथे में मोक्ष होता है।
ताश के 4 प्रकार जिंदगी के चार रंग-
आप यह तो जानते ही है कि ताश के पत्तों के चार प्रकार होते हैं- 1.पान, 2.चिड़ी, 3.ईंट और 4.हुकुम। अंत में एक पांचवां प्रकार भी होता है जिसे जोकर कहते हैं। जिंदगी के चार रंग- पहला बादशाह, दूसरा बेगम, तीसरा इक्का और चौथा गुलाम। ये जिंदगी के 4 रंग हैं। यदि गुलाम को 11, बेगम को 12, बादशाह को 13 और जोकर को 1 माना जाए तो अंकित चिह्नों का योग 365 के बराबर होता है।
कैसे जानें भविष्य या बुरे दिनों के बारे में?
जन्मपत्री तथा हस्तरेखा का अध्ययन करने के बाद पहले इक्का से अट्ठी तक चारों रंग के पत्ते अलग-अलग छांट लें और फिर उसे तब तक मिलाते जाएं, जब तक कि इच्छा हो। जब मिलाना बंद कर दें तो फिर उसके कुछ पत्ते बाएं हाथ से कटवा लें। याद रहे यदि आप बाएं हाथ से लिखने आदि का कार्य करते हों तो दाएं हाथ के पत्ते कटवा लें। बाद में बाकी बचे हुए पत्ते, एक गड्डी बनाकर रख लें और क्रमश: ऊपर से लेकर नीचे तक का पत्ता कौन-सा है, यह नोट करके रख लें। नोट करने के बाद सांकेतिक भाषा का प्रयोग करते हुए पहली बार जो पत्ते खींचे गए उन्हें ही नोट करना चाहिए, क्योंकि उसी से सही भविष्य पता चलेगा, क्योंकि पहला पत्ता जन्मपत्री की तरह होता है।
अब करें विश्लेषण-
मान्यता अनुसार बादशाह वाला वर्ष सर्वश्रेष्ठ होता हैं जबकि अट्ठी और गुलाम वाले वर्ष साधारण होते हैं। अट्ठाईस पत्ते क्रमश: 1-1 साल के प्रतीक हैं। 29 साल का भविष्य जानने के लिए फिर से पहले पत्ते को 29वां साल मानना होगा। इसका मतलब यह कि इतिहास अपने आपको दोहराता है।
माना जाता है कि जिस वर्ष बादशाह का पत्ता आता है, उस वर्ष व्यक्ति की दशा बादशाह जैसी होती है। इस वर्ष प्राय: श्रेणी अथवा स्थान का अंक प्राप्त होता है।  ज्योतिष मान्यता अनुसार इक्का, बादशाह और गुलाम के पत्तों में पुत्र संतान की प्राप्ति अधिक होती है, जबकि अट्ठी और गुलाम के पत्तों में अक्सर कन्या संतान ही पैदा होती है। बेगम वाले वर्षों में विवाह के योग अधिक होते हैं।
बादशाह वाले वर्षों में व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूरी होने की संभावना रहती है, महत्वपूर्ण कार्य होते हैं और ऐसे व्यक्तियों से संपर्क होता है, जो उसके कार्य में सहायक सिद्ध होते हैं। महत्वपूर्ण पत्र की प्राप्ति, नौकरी, पुत्र प्राप्ति आदि शुभ घटनाएं इसमें होती देखी गई हैं। बादशाह वाले वर्षों में पत्रिका में भी श्रेष्ठ अंतर्दशा निश्चित रूप से आती है। अट्ठी और गुलाम के वर्षों में साधारण दशाएं आती हैं। यह भी देखा गया है कि अट्ठी और गुलाम के वर्षों में शारीरिक, मानसिक व आर्थिक परेशानी, घटना-दुर्घटना, घर में किसी की मौत, नौकरी में खराबी, धोखा, हानि जैसी घटनाएं हो सकती हैं।
ताश की इस विद्या से प्रतिमाह का फल भी निकाला जाता है। उसके लिए वर्ष वाले पत्ते से 1-1 पत्ता छोड़ देने पर वर्ष वाले माह के बाद आगे के फल मिलते चले जाते हैं। दिन-प्रतिदिन के भविष्य के लिए जन्म तारीख से लेकर आगे के दिन लगातार गिनने चाहिए। शेष पत्तों में अट्ठी और गुलाम के पत्तों वाले मास और वर्ष के दिनों में बदपरहेजी, बड़े जोखिम, बड़े लेन-देन, बहसबाजी, वाहन को तेज गति से चलाने आदि से बचना चाहिए।
इसे ऐसे भी कर सकते हैं-
अपने भविष्य के बारे में जानने के लिए हमेशा 4 पत्तों को उठाया जाता है। पहला पत्ता उसके धर्म से संबंधित होता है, दूसरा उसके द्वारा किए जाने वाले कर्म से संबंध रखता है, तीसरा पत्ता उसके द्वारा संबंधों के बारे में बताता है और चौथा पत्ता उसकी चाहत के लिए और भविष्य की इच्छाओं के लिए बयान करता है।- ताश के पत्तों से भविष्यफल के चार प्रकार- 1- हूकुम, 2- पान, 3- ईंट, 4- चिड़िया।
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