जर्नलिस्ट पूजा तिवारी ने किया आत्महत्या

WhatsApp-Image-20160503 (2) आज फरीदाबाद की एक जर्नलिस्ट की आत्महत्या के बाद पूरे देश में सनसनी मची हुई है, पूजा तिवारी का मामला कई दिनों से चल रहा था, उसने फरीदाबाद के सभी जर्नलिस्टों से सहायता भी माँगी थी लेकिन शायद अपनी लड़ाई में अकेली होने और पुलिस द्वारा बार बार परेशान किये जाने के कारण उसने अपनी जान दे दी साथ ही पूरे मीडिया जगत पर तमाचा भी जड़ दिया। जानकारी के अनुसार उसने भ्रूण हत्या करने वाले कुछ डाक्टरों का स्टिंग किया था लेकिन डॉक्टर ने पूजा तिवारी पर २ लाख रुपये मांगने और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगा दिया इसके बाद पुलिस उसे परेशान करने लगी।

जानकारी के अनुसार पूजा तिवारी की किसी युवक के साथ शादी भी तय हुई थी लेकिन उस पर ब्लैकमैलिंग का आरोप लगाए जाने के कारण और फरीदाबाद के जर्नलिस्टों की मदद ना मिलने के कारण उसका रिश्ता टूट गया, इससे परेशान होकर पूजा तिवारी ने सद्भावना अपार्टमेंट्स की पांचवी मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी।

पूजा तिवारी की आत्महत्या के लिए फरीदाबाद के ज्यादातर जर्नलिस्टों के साथ साथ भ्रूण हत्या करने वाले डोक्टरों का गैंग और पुलिस प्रशासन भी जिम्मेदार है यह आपको आत्महत्या से पहले लोकल मीडिया को भेजे गए उनके ईमेल से साफ़ पता चल जाएगा।

जर्नलिस्ट पूजा तिवारी मामले की पूरी कहानी

मैं पूजा तिवारी “IaminDNA”, Zee Digital Convergence Limited से फरीदाबाद की रिपोर्टर हूँ।
सितंबर 21, 2015 को मैंने बतौर रिपोर्टर ,IaminDNA ज्वाइन  किया था और फरीदाबाद शहर में कई एक्सक्लूसिव और खोजी खबरों पर काम भी किया हैं।

हाल ही में मैंने एक विश्वसनीय सूत्र की सूचना पर मार्च 9, 2016 की शाम को एक झोलाछाप डॉक्टर- डॉ. धवल सिंह पर स्टिंग किया था। मुझे यह भी बताया गया था की यह डॉक्टर महिलाओं को MTP (Medical Termination of Pregnancy) KIT देता हैं और MTP भी करवाता हैं। इन सब सूचनाओं के आधार पर मैंने अपने संस्थान में चर्चा की जिसके चलते मुझे स्टिंग करने की अनुमति मिली।

चूंकि मैं एक लड़की हूँ तो इस स्टिंग के लिए मैंने अपने एक पुरुष मित्र का सहयोग लिया। जिनका नाम अनुज मिश्रा हैं। चूँकि अनुज मिश्रा पीछे से मीडियाकर्मी रहा हैं तो मैंने उनका सहयोग लिया। यहाँ बात भी मैंने अपने संस्थान में बता दी थी।

यह स्टिंग हम लोगों ने दयाल नगर, ग्रीन फील्ड कॉलोनी में किया था। मैं वहा बतौर मरीज़ बनकर के गयी थी ताकि MTP संबंधित जानकारी हासिल की जा सके। अनुज मिश्रा ने स्टिंग की प्लानिंग के अनुसार मेरे पति होने की भूमिका निभाई।

अनुज मिश्रा ने डॉक्टर धवल सिंह को अपने विश्वास में ले कर के कहा की मेरी पत्नी प्रेग्नेंट है और इनका MTP कराना है। इस बात पर डॉक्टर ने कहा मैं सब करवा दूंगा मेरे शहर की जानी मानी gynaecologist डॉक्टर अर्चना गोयल से अच्छे संपर्क हैं। मेरे एक फ़ोन करने पर वो सब कुछ कर देंगी। उनका PRO मेरा मित्र है और MTP से ले कर के वो सारे सर्जिकल भी कर देंगी। मैं उनको पर्सनली भी फ़ोन कर दूंगा। डॉक्टर अर्चना गोयल का विजिटिंग कार्ड भी उसने हमें दिखाया। जिसकी हमने फोटो भी ली थी।  इसके बाद उसने शहर के जाने माने ट्यूबरक्लोसिस के डॉक्टर रमन कक्कर का नाम भी लिया और साथ ही खुद को बीके हॉस्पिटल का डॉक्टर भी बताया। फिर हम लोग वहा से चले आये।

यहाँ सब कुछ मैंने अपने बॉस को बताया और उन्होंने कहा था की डॉक्टर अर्चना गोयल का भी वर्जन लो। 12 मार्च, 2016 को अनुज ने डॉक्टर अर्चना गोयल को फ़ोन किया। चूँकि ये स्टिंग डॉक्टर धवल सिंह पर था जिसने डॉक्टर अर्चना का नाम लिया था तो फ़ोन पर डॉक्टर अर्चना को सब कुछ बताना ठीक नहीं था। न ही यहाँ मेरी या अनुज की कोई गलत इंटेंशन थी। एक नार्मल कोर्स में फ़ोन किया गया था जिसमे अनुज ने डॉक्टर अर्चना को साफ़ कहा है की हमारी एक टीम ने एक झोलाछाप डॉक्टर पर स्टिंग किया हैं और वो आपका नाम MTP के संदर्भ में ले रहा हैं।  आप जानी मानी डॉक्टर हैं तो आपसे मिलना हैं क्योंकि आपका पक्ष भी जानना हैं और टीम को न्यूज़ चलानी हैं और इस पर आगे कारवाही भी करनी हैं।

फ़ोन पर डॉक्टर अर्चना ने झोलाछाप का नाम भी पुछा लेकिन अनुज ने नहीं बताया क्योंकि ये एक स्टिंग ऑपरेशन था तो फ़ोन पर सब कुछ बताना उचित नहीं था। इसके बाद डॉक्टर अर्चना ने अनुज को कहा शाम तक आपको बताती हूँ। शाम को अनुज के पास डॉक्टर अर्चना का फ़ोन आया जो की अनुज ने नहीं उठाया। क्योंकि वो उस समय कही व्यस्त थे। अनुज ने मुझे मेसेज किया और कहा की डॉक्टर अर्चना से बात कर लो वो मुझे फ़ोन कर रही हैं। आप उनसे टाइम ले लो और अपनी न्यूज़ बनाओ।

मैंने डॉक्टर अर्चना को फ़ोन किया और बताया की मैं Iamin DNA से हूँ और मैंने एक स्टिंग किया हैं। तब डॉक्टर अर्चना ने 14 मार्च, 2016 सोमवार को 1 बजे मिलने का समय दिया।

सोमवार को 1 बजे हम डॉक्टर अर्चना गोयल से उनके प्राइवेट क्लिनिक गोयल नर्सिंग होम में जा कर के मिले। उन्होंने खुद न बात करते हुए हमे डॉ. अनिल गोयल उनके पति से मिलवाया और बात करने को कहा और वे खुद वह से उठ कर के चली गयी।

मैंने डॉ. अनिल गोयल को सारा मामला बताया और स्टिंग की वीडियो भी उनके कहने पर दिखाई। डॉ. अनिल गोयल ने मुझसे पुछा भी की अभी तक आपने खबर तो नहीं चलायी और बीच में उन्होंने हमारा फ़ोन भी चेक किया था की कही हम कुछ रिकॉर्ड तो नहीं कर रहे हैं। मैंने उनसे कहा भी था की एक झोलाछाप आपकी पत्नी का नाम ले रहा हैं इस बारे में आप क्या कहना चाहते हैं। तब डॉक्टर अनिल गोयल ने मुझसे झोलाछाप डॉ. धवल सिंह का नंबर माँगा और कहा की इससे बात कर के मैं आज ही आपको बताऊंगा। मैंने उन्हें कहा भी की आज अपना वर्जन दे दीजियेगा क्योंकि न्यूज़ सबमिट करनी हैं। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया की आज ही शाम तक आपको बताता हूँ।

इस के बाद उस दिन डॉक्टर अनिल गोयल का मेरे पास कोई फ़ोन नहीं आया जिसके चलते हम लोग अगले ही दिन मंगलवार को डॉक्टर रमन कक्कर से मिलने गए जिनका नाम भी उस झोलाछाप डॉक्टर ने स्टिंग के दौरान लिया था।

डॉक्टर कक्कर के न मिलने पर हम लोग फिर सीधे सीएमओ डॉ. गुलशन अरोड़ा से मिले। मैंने सीएमओ को सारे  मामले से अवगत कराया। सीएमओ नेे मेरे काम को सरहाया और मुझसे अपनी टीम जो की रेड मारती हैं में शामिल होने के लिए भी कहा। उन्होंने मुझे बताया की पहले भी इन लोगों के खिलाफ शिकायते आ चुकी हैं।

डॉ. धवल सिंह व डॉ. अर्चना गोयल के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए उन्होंने मुझे आश्वासन भी दिया। चूंकि डॉ. अनिल गोयल द्वारा हमें इस संबंध में कोई भी स्पष्ट जवाब नहीं मिला लिहाज़ा उसी दिन मैंने वो खबर अपने संस्थान को वीडियो और सीएमओ के बाइट के साथ भेज दी थी।

इसके चार दिन बाद डॉ. अनिल गोयल का मेरे पास फ़ोन आया था जिसमें उन्होंने मुझसे कहा की डॉ. धवल सिंह का फोन बंद हैं।

1 अप्रैल, 2016 को डीएनए ने यहाँ खबर लाइव कर दी जिसके बाद दिनांक 8 अप्रैल, 2016 को डॉ. अनिल गोयल ने मेरे और अनुज मिश्रा के खिलाफ FIR कर दी।

जिसमें उन्होंने आरोप लगाया की हम दोनों पत्रकार पिछले 15 दिनों से उन्हें 2 लाख रुपए मांगने के लिए ब्लैकमेल कर रहे है। उन्होंने पुलिस को कोई सीडी और एक कॉल रिकॉर्डिंग भी भेजी जिस पर पुलिस ने बगैर हमारा पक्ष जाने व सुने तुरंत एफआईआर नंबर 166/16 दर्ज कर दी।9 अप्रैल को पुलिस अनुज को थाने ले गयीं। मुझे पता चला तो मैं खुद वह पहुँची।

सेंट्रल थाने में SHO भारत भूषण और एसीपी सेंट्रल को उपरोक्त सारी सच्चाई से अवगत कराया गया तथा ऐसा कोई भी तथ्य सामने नहीं आया जिससे उपरोक्त एफआईआर सही दर्ज की जानी प्रतीत होती हो। डॉक्टर अनिल गोयल ने एक CD और एक Audio call रिकॉर्डिंग भी भेजी थी। जब वो चलायी गयी तो CD खाली निकली और Audio call रिकॉर्डिंग में वही रिकॉर्डिंग थी जिसमे अनुज ने डॉक्टर अर्चना से मिलने का समय माँगा था। कोई पुख्ता सबूत न मिलने पर ACP ने हमे जाने दिया और आगामी होने वाली तफ्तीश में पूर्ण सहयोग देने का भी आश्वासन लिया।

> अहम सवाल जिनकी तरफ मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगी-

> मेरा स्टिंग एक फ़र्ज़ी झोलाछाप डॉक्टर धवल सिंह के खिलाफ था न की डॉक्टर अर्चना गोयल के खिलाफ तो एफआईआर मेरे और अनुज मिश्रा के खिलाफ क्यों हुई?
> जब डॉक्टर अर्चना गोयल ने इस बात की रिकॉर्डिंग कर ली थी कि पत्रकारों ने उनसे मिलने का समय मांगा। तो फिर जब लगातार 15 दिनों तक जैसा कि एफआईआर में डॉ अनिल गोयल ने दर्ज करवाया है कि दो लाख रूपये मांगे गये तो उसकी रिकॉर्डिंग क्यों नहीं है?
> पुलिस प्रशासन की जांच एक तरफा हैं , डॉ. धवल सिंह की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा जो की अभी फरार हैं और न ही डॉ. अनिल गोयल से कोई पूछताछ कर रहा हैं
> अगर 15 दिन से ब्लैकमेल कर रहे थे 1 अप्रैल को खबर के आने पर एफआईआर 8 अप्रैल को क्यों?
>  पुलिस ने बिना किसी सबूत तथा बिना हमको दरखास्त के संबंध में बुलाये बिना एफआईआर दर्ज कर ली। पुलिस पर ऐसा क्या दबाव था की उन्होंने इतना भी जानना उचित नहीं समझा की मैं असल पत्रकार हूँ या जाली पत्रकार। जब की एफआईआर में हमारे मोबाइल नंबर स्पष्ट रूप से दर्शाये गए हैं जिससे पुलिस आसानी से हमसे संपर्क कर सकती थी।
> क्या हमारे द्वारा ऐसा कोई संज्ञेय अपराध किये जाने की संभावना बाकी रह गयी थी जबकि प्रथम सूचना रिपोर्ट में साफ लिखा है की हमारे द्वारा स्टिंग ऑपरेशन पहले ही चलाया जा चुका था।
> असली गुनाहगार डॉ धवंल सिंह फरार है। पुलिस उसे क्यों नहीं पकड़ पा रही?
> फर्जीवाड़े का मामला तब बनता है जब वो कोई फेक आईडेंटिटी यूज करे! यहां ऐसा कुछ नहीं था! तो फिर हम लोगों ने फर्जीवाड़ा कहां किया?
> मैं नो सालों से पत्रकारिता कर रहीं हूँ।कई बड़े मीडिया हाउस में काम कर चुकी हैं तो मुझे फर्जी पत्रकार कह कर एफआईआर कैसे दर्ज की गयी?
> शाम को मीडिया कर्मियों ने ही यह खबर ऑनलाइन चलाई जिसमें SHO भारत भूषण ने यह स्टेटमेंट दिया की आरोपी फरार हैं। जबकि हम थाने में ही मौजूद थे।

– यहीं नहीं कई मीडिया पोर्टल्स पर मेरी फ़ोटो बिना मेरे इज़ाज़त के फेसबुक से निकलकर लगाईं गयी।
– 17 अप्रैल,2016 को दैनिक भास्कर ने यह खबर चलायी वो भी SHO के हवाले से की मेरे संस्थान ने मुझे अपना कर्मचारी मानने से इनकार कर दिया। जबकि मेरे संस्थान से लैटर SHO के पास जा चूका हैं।

– आप सभी से मेरा निवेदन हैं की मेरी इस संकट की घड़ी में मेरा साथ दे। मेरी लड़ाई झूठ के खिलाफ़ हैं और मुझे न्याय दिलाने में मेरा साथ दे। 9 साल के मेरे कैरियर में ऐसी कभी कोई बात नहीं हुईं हैं और न ही मैंने आज तक किसी भी व्यक्ति से कोई नाजायज़ तौर पर पैसा लिया हैं। आज आप लोगों के stand की ज़रूरत हैं। कृपया मेरा साथ दे।

पूजा तिवारी

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