जन्म के 7 दिन के भीतर हो रही 82% नवजातों की मौत, जानिए पूरा मामला

उत्तर प्रदेश से नवजातों को लेकर आए कुछ आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। इन आंकड़ों के अनुसार 82 फीसदी नवजातों की मौत जन्म के 7 दिन के भीतर ही हो रही है। समाचार पत्र नवभारत टाइम्स में छपी एक खबर के अनुसार यह अध्ययन वाराणसी, कौशांबी और सोनभद्र में हुआ है। जहां पता चला कि 82 फीसदी नवजातों की मौत जन्म के एक सप्ताह के भीतर हो गयी। इसमें 58 फीसदी नवजातों की मौत घर पर हुई। जबकि 20 फीसदी निजी अस्पताल में और शेष 18 प्रतिशत नवजातों की मौत सरकारी अस्पतालों में हुई।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 27 फीसदी नवजातों की मौत निमोनिया से जबकि 24 फीसदी नवजातों की मौत रेस्पिरेट्री डिस्टेस्स सिंड्रोम यानी की सांस लेने की समस्या के चलते हुई है। चाइल्ड राइट्स एंड यू(क्राइ) की ओर से 2018 अप्रैल से 31 मार्च 2019 तक के लिए गये अध्ययन के आधार पर यह हकीकत सामने आई है। वहीं सोमवार को आयोजित एक वेबिनार में यह आंकड़े जारी किये गये। क्राई की क्षेत्रीय निदेशक सोहा मोइत्रा ने इस दौरान बताया कि शिशुओं की देखभाल को लेकर क्राइ लगातार काम कर रहा है। इसी के तहत कौशांबी में 60 गांव, वाराणसी में 50 गांव और सोनभद्र में 28 गांवों में काम किया जा रहा है।

अध्ययन में सामने आ रहे यह तथ्य
प्रकाशित रिपोर्ट में यह बताया गया कि सामने निकलकर आ रहे आंकड़ों और अध्ययन में यह पता चला है कि 78 फीसदी गर्भवतियों के प्रसव अस्पताल में ही हुए हैं। हालांकि प्रसव के एक ही दिन में 69 फीसदी महिलाओं को अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी। वहीं हो रहे प्रसव को लेकर सामने आएं आकड़ों के मुताबिक सिर्फ 14 फीसदी प्रसव डॉक्टरों की ओर से करवाए गये। जबकि शेष 86 फीसदी प्रसव एएनएम की ओर से करवाए गये। जबकि कौशांबी से सामने आए आंकड़े तो और भी अधिक चौंकाने वाले हैं। कौशांबी जनपद में एएनएम ने 88 फीसदी जबकि सिर्फ 12 फीसदी प्रसव डॉक्टर द्वारा करवाए गये हैं।

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