क्यों मनाते हैं हरियाली तीज का  त्योहार? जानें पूजा का महत्व, विधि और शुभ मुहूर्त..

हरियाली तीज का त्योहार सौभाग्य और मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है। तीज के दिन सभी सुहागने अपने पति कि लंबी आयु के लिए व्रत रखती है। आज का दिन भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। कुवारी लड़कियां भी अपने मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत को श्रद्धा-भाव से रखती हैं।

हरियाली तीज के व्रत  करने का विधान भाद्रपद शुक्ल की तृतीया को होगा। हरियाली तीज का शुभ मुहूर्त 1.36  बजे से शुरू होगा और 22.05  बजे खत्म होगा। यह व्रत द्वितीया और तृतीया तिथि के बीच न होकर अगर चतुर्थी के बीच हो तो अत्यंत शुभकारी माना जाता हैइस व्रत को करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

 

क्यों मनाते है हरियाली तीज का त्योहार

 कहा जाता है कि इस दिन माता पार्वती सैकड़ों वर्षों की साधना के पश्चात् भगवान् शिव से मिली थीं। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 107 बार जन्म लिया फिर भी माता को पति के रूप में शिव प्राप्त न हो सके। 108 वीं बार माता पार्वती ने जब जन्म लिया तब श्रावण मास की शुक्ल पक्ष तृतीय को भगवन शिव पति के रूप में प्राप्त हो सके।  

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तभी से इस व्रत का प्रारम्भ हुआ। साथ ही देवी पार्वती के कहने पर श‌िव जी ने आशीर्वाद द‌िया क‌ि जो भी कुंवारी कन्या इस व्रत को रखेगी और श‌िव पार्वती की पूजा करेगी उनके व‌िवाह में आने वाली बाधाएं दूर होंगी साथ ही योग्य वर की प्राप्त‌ि होगी।

सुहागन स्‍त्र‌ियों को इस व्रत से सौभाग्य की प्राप्त‌ि होगी और लंबे समय तक पत‌ि के साथ वैवाह‌िक जीवन का सुख प्राप्त करेगी। इसल‌िए कुंवारी और सुहागन दोनों ही इस व्रत का रखती हैं। आज के दिन महिलाऐ अपने हाथों, कलाइयों और पैरों पर मेंहदी रचाती है और साथ ही अपने कुल की बुजुर्ग महिलाओं से आशीर्वाद भी लेती है।

इस व्रत में सास नई दुल्हन को वस्‍त्र, हरी चूड़‌ियां, श्रृंगार सामग्री और म‌िठाइयां भेंट करती हैं। इनका उद्देश्य होता है दुल्हन का श्रृंगार और सुहाग हमेशा बना रहे और वंश की वृद्ध‌ि हो।

 

हरियाली तीज की पूजा को करने की विधि
–  सुबह उठकर स्‍नान करने के बाद मन में व्रत का संकल्‍प लें।
–  सबसे पहले घर के मंदिर में काली मिट्टी से भगवान शिव शंकर, माता पार्वती और गणेश की मूर्ति बनाएं।
–  अब इन मूर्तियों को तिलक लगाएं और फल-फूल अर्पित करें।
–  फिर माता पार्वती को एक-एक कर सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
–  इसके बाद भगवान शिव को बेल पत्र और पीला वस्‍त्र चढ़ाएं।
–  तीज की कथा पढ़ने या सुनने के बाद आरती करें।
–  अगले दिन सुबह माता पार्वती को सिंदूर अर्पित कर भोग चढ़ाएं।
–  प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रत का पारण करें।

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हरियाली तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त 

1-  हरियाली तीज की तिथि: 03 अगस्‍त 2019 

2- हरियाली तीज की तिथि आरंभ: 03 अगस्‍त 2019 की सुबह 07:06     

3-  हरियाली तीज की तिथि समाप्‍त: 04 अगस्‍त 2019 की सुबह 03:36

 

 

 

 

 

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