कहानी जिससे मिलती है जीवन जीने की सीख

images-(7)_56ff21f250094 (1)एजेन्सी/आप भी जानते है प्राचीन भारत में लोग ज्ञान प्राप्ति के लिए किसी भी हद से गुजर जाने के तैयार रहते थे लेकिन क्या आप जानते है की एक विद्यार्थी और आचार्य गोपालनाथ की भी कुछ ऐसी ही कहानी थी जिसे जानकार आप भी जान लेंगे की यही सत्यता है जीवन की । एक विद्यार्थी था। उसे विविध विषयों पर ज्ञान की प्राप्ति का बड़ा शौक था। उसने प्रकांड विद्वान गोपालनाथ जी का नाम सुन रखा था। ज्ञान की लालसा में एक दिन अंतत: वह गोपालनाथ के पास पहुंच ही गया और उनसे पूछा कि वह भी किस तरह से उनकी तरह प्रकांड पंडित बन सकता है। गोपालनाथ बहुत कम बात करते थे। विद्यार्थी को यह बात बोलकर बताने की बजाय उसे वह समुद्र तट पर ले गए। जब किसी बात को सिद्ध करना होता था तब सुकरात इसी तरह की विचित्र किस्म की विधियां अपनाते थे। समुद्र तट पर पहुंच कर वह बिना अपने कपड़े उतारे समुद्र के पानी में उतर गए। विद्यार्थी ने समझा कि यह भी ज्ञान प्राप्ति का कोई तरीका है अत: वह भी सुकरात के पीछे-पीछे कपड़ों सहित समुद्र के गहरे पानी में उतर पड़ा। अब गोपालनाथ पलटे और विद्यार्थी के सिर को पानी में बलपूर्वक डुबा दिया। विद्यार्थी को लगा कि यह कुछ चमत्कार याकरिश्मा हो जिसमें ज्ञान स्वयंमेव प्राप्त हो जाता हो। उसने प्रसन्नतापूर्वक अपना सिर पानी में डाल लिया परन्तु एकाध मिनट बाद जब उस विद्यार्थी को सांस लेने में समस्या हुई तो उसने अपना पूरा जोर लगाकर आचार्य का हाथ हटाया और अपना सिर पानी से बाहर कर लिया। हांपते हुए और गुस्से से उसने गोपालनाथ से कहा, ‘‘यह क्या कर रहे हो आप? आपने तो मुझे मार ही डाला था।’’   जवाब में गोपालनाथ ने विनम्रतापूर्वक विद्यार्थी से पूछा, ‘‘जब तुम्हारा सिर पानी के भीतर था तो सबसे ज्यादा जरूरी वह क्या चीज थी जो तुम चाहते थे?’’ विद्यार्थी ने उसी गुस्से में कहा, ‘‘सांस लेना चाहता था और क्या!’’ तब आचार्य ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,जिस बदहवासी से तुम पानी के भीतर सांस लेने के लिए जीवटता दिखा रहे थे, वैसी ही जीवटता जिस दिन तुम ज्ञान प्राप्ति के लिए अपनी भीतर पैदा कर लोगे तो समझना कि तुम्हें ज्ञान की प्राप्ति हो गई है। यही हमारे जीवन में भी लागू होता है की जाब हम अपने ज्ञान या सफलता के लिए यही अटूट प्रयास करेंगे तो ज्ञान या सफलता जरुर मिलेगी।

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