एसओ से लेकर डीजीपी तक मदद की गुहार, पत्रकार को नही मिली पुलिस की सहायता

पत्रकार का गुनाह सिर्फ इतना था कि वो लोकतंत्र के सच्चे पहरी की भूमिका निभाकर समाज और प्रशासन को सच्चाई का आईना दिखाना चाहता था। खुलेआम हो रहे सट्टे की वीडियो रिकॉर्डिंग करना उसके लिए बहुत बड़ा अपराध हो गया। खुलेआम हो रहे सट्टे की वीडियो रिकॉर्डिंग करने के बाद सटोरियों ने फायरिंग की। पत्रकार किसी तरह वहां से जान बचाकर भागा तो उसकी बाइक के पीछे कई वाहन लग लगे। उन वाहनों को चकमा देने में पत्रकार सफल हो गया तो स्थानीय पुलिस को सूचना देने के लिए पत्रकार ने कॉल की तो एसओ ने कॉल रिसीव नही की। लिहाजा पत्रकार ने 100 नंबर डायल करके कंट्रोल नंबर को घटना से अवगत कराया, लेकिन जब कोई हेल्प नही मिली तो एसएसपी को कॉल की, लेकिन एसएसपी ने भी कॉल रिसीव नही। इमरजेंसी में न्याय एवं मदद की आस लेकर पत्रकार ने डीजीपी को कॉल की और मदद की गुहार लगाई एवं सारे घटनाक्रम से डीजीपी के पीआरओ को अवगत कराया। डीजीपी के पीआरओ ने मदद का आश्वासन दिया, लेकिन कई घंटे बीते जाने के बाबजूद पत्रकार को पुलिस प्रशासन की ओर से कोई मदद नही मिली।

ये सारा वाकया यूपी के एटा जनपद के मारहरा कसबे में पत्रकार अमन पठान के साथ हुआ है। घटनाक्रम में 100 प्रतिशत सच्चाई है। अब कोई आरोप कुछ भी लगाये। घटना घटित होने के बाद की सारी काल एवं वीडियो रिकॉर्डिंग पत्रकार अमन पठान के पास सुरक्षित हैं। सट्टा माफिया पत्रकार अमन पठान को पुलिस की मदद से जान से मार सकते हैं, लेकिन सच की आवाज को कभी दवा नही सकते हैं। एक अमन पठान के मरने के बाद सौ अमन पठान पैदा होंगे। जो सच का साथ देंगे।
मैं अमन पठान जो आज एक जंगल में भयभीत हूँ और अपनी जान बचाने की खातिर भारत के समस्त पत्रकार भाइयों से मदद की अपील करता हूँ। अगर हो सके तो मेरी मदद करें। मेरे लिए न सही तो मेरी 2 माह 12 दिन की बेटी की खातिर में जान की हिफाजत करने में अपना सहयोग प्रदान करें। सट्टे का खुलासा करने की मैं गलती कर चुका हूँ। अब पत्रकार भाइयों फैसला आपको करना है।

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