आतंकियों को जन्नत में मिलती है 72 पत्नियां, जानें सच या गलत

ज्यादातर नौजवानों को आतंकी बनाने के लिए जन्नत और 72 हूरों के सपने दिखाए जाते हैं. यह इस्लामिक कट्टरपंथियों का ब्रेनवॉश करने का बहुत पॉपुलर तरीका है. द गार्जियन के पत्रकार इब्न वकार के लेख में बताया है कि इन्हीं तरीकों से युवाओं को बरगलाया जाता है. उन्होंने अपने लेख के लिए इस्लाम विशेषज्ञ क्रिस्टोफ लग्जनबर्ग की किताब ‘डाइ सायो-अर्माशे लेसार्ट दे कुरान’ का सहारा लिया है.

किताब के अनुसार, चाहे अलकायदा हो, जैश-ए-मोहम्मद, बोको हराम या हमास सारे ही अपने लड़ाकों को बताते हैं कि अगर वे मज़हब की राह में अपनी जान देंगे तो उन्हें जन्नत नसीब होगी. जन्नत में भी उन्हें हमेशा युवा रहने वाली और गहरी काली आंखों वाली 72 हूरों या 72 पत्नियों के साथ कभी न खत्म होने वाले कथित आनंद के बारे में बताया जाता है.

हालांकि यह किताब मुस्लिम जानकारों को उद्धृत करते हुए यह भी कहती है कि इस्लाम में खुदकुशी हराम है. उनका दावा है कि खुदकुशी के बारे में कुरान में कुछ नहीं कहा गया है लेकिन अरबी में हदीस में इसे हराम बताया गया है. हदीस पैगंबर की बातों और उनके कार्यों का संकलन है. इसमें उनके और उनके साथियों के शासन चलाने के तरीके भी बताए गए हैं.

किताब के अनुसार 9वीं शताब्दी के विद्वान अल-तिरमिधी की ‘सुन्ना की किताब’ कहती है जन्नत एक हकीकत है. इस किताब के 21वें चैप्टर में बताया गया है कि जन्नत जाने वालों को सबसे छोटा ईनाम यह मिलता है कि उन्हें रहने को एक घर मिलता है जिसमें 80 हजार नौकर होते हैं और 72 बीवियां होती हैं. घर में ऊपर एक गुंबद होता है जो कि मोतियों, नीलम और मणियों से जड़ा होता है. जिसे काफी दूर से ही देखा जा सकता है.

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इसी किताब के अनुसार इसमें दो चीजें ध्यान देने वाली हैं. पहली कि कुरान में कहीं भी हूरों की असली संख्या का जिक्र नहीं है. और दूसरा कि काली आंखों वाली युवतियों के जन्नत में मिलने का जिक्र सारे ही इस्लाम को मानने वालों के लिए किया गया है. न कि सिर्फ शहीदों के लिए. हालांकि यह किताब यह भी कहती है कि हदीस में हूरों की निश्चित संख्या ’72’ का जिक्र है.

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