आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में शोध कार्य बढ़ाने की जरूरत : टंडन

पटना। बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन ने वर्तमान समय में उपलब्ध चिकित्सा-पद्धतियों में भी आयुर्वेद को अद्वितीय एवं उत्कृष्ट बताते हुए कहा कि आज आयुर्वेद की स्वीकार्यता भारत के अतिरिक्त विदेशों में भी बढ़ती जा रही है।

लालजी टंडन

उन्होंने कहा कि आज जरूरत सिर्फ आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में शोध कार्य बढ़ाने और भारत में एक बार फिर इसे स्थापित करने की है। विश्व आयुर्वेद परिषद् की बिहार इकाई द्वारा पटना में आयोजित चर्मरोग पर आधारित दो दिवसीय सेमिनार का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल ने शनिवार को कहा, “हमारे जीवन पद्धति में धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष चार पुरुषार्थो का वर्णन है, इन पुरुषार्थ चतुष्टयों की प्राप्ति आरोग्यता पर ही आधारित है। यह आरोग्यता आयुर्वेद से ही संभव है।”

राज्यपाल ने कहा, “यह प्रथम बार संभव हुआ है कि भारत में अलग से आयुष मंत्रालय की स्थापना की गई है एवं आयुष मंत्री बनाए गए हैं। दिल्ली में आयुर्वेद का अखिल भारतीय संस्थान प्रारंभ किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ की भी घोषणा हुई।”

आयुर्वेद द्वारा बताई गई जीवन शैली का पालन करने पर जोर देते हुए टंडन ने कहा कि दोषपूर्ण जीवन शैली के कारण मनुष्य विविध प्रकार के रोगों से ग्रस्त होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हम प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं, विकृतियां हमारे निकट आ रही है।

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने भी आयुर्वेद चिकित्सा पर जोर देते हुए कहा कि राज्य में आयुर्वेदिक कॉलेजों के विकास के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

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राज्यपाल ने ‘स्मारिका’ भी लोकार्पित की तथा दिवंगत वैद्य रमाकांत पाठक की स्मृति में आयोजित ‘निबंध-प्रतियोगिता’ के सफल प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया।

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इस मौके पर विश्व आयुर्वेद परिषद् के अध्यक्ष डॉ़ बी़ एम़ गुप्ता, परिषद् के प्रदेश अध्यक्ष डॉ़ आऱ पी़ उपाध्याय, डॉ़ अशोक कुमार दूबे, डॉ़ एम़ एम़ मिश्रा तथा डॉ़ प्रजापति त्रिपाठी सहित कई लोग उपस्थित थे।

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