
जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से कृषि के भविष्य को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, हावलबाग में एक भव्य राज्य स्तरीय “खेत बचाओ अभियान” आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मृदा की उर्वरता बढ़ाना, पारंपरिक मोटे अनाजों को बढ़ावा देना और किसानों को बदलते पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक ज्ञान से लैस करना था, जिसके तहत रागी (मंडुआ), बाजरा (झांगोरा), चौलाई (अमरंथ) और अन्य स्वदेशी फसलों जैसे पारंपरिक मोटे अनाजों के संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने कहा कि “खेतों को बचाओ अभियान” अब केवल सरकारी पहल नहीं रह गया है, बल्कि जनभागीदारी से प्रेरित एक जन आंदोलन बन गया है। उन्होंने किसानों से अपनी कृषि भूमि, मिट्टी और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने का संकल्प लेने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मिट्टी मात्र जमीन का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि इसे मां के समान सम्मान दिया जाता है। इसलिए, मिट्टी की उर्वरता को संरक्षित करना और खेतों को हानिकारक रसायनों से यथासंभव मुक्त रखना आवश्यक है।




