
उत्तराखंड में बुधवार (1 जुलाई) से मदरसा शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव लागू हो गया है, जिसके तहत उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया गया है। सरकारी आदेश के अनुसार, राज्य के सभी मान्यता प्राप्त मदरसे अब राज्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान प्राधिकरण के अधीन होंगे, जो उनकी मान्यता, पाठ्यक्रम, प्रशासन और नियामक ढांचे की देखरेख करेगा। इस कदम के साथ उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है जिसने अपने मदरसा शिक्षा बोर्ड को भंग कर मान्यता प्राप्त मदरसों को विद्यालय जैसी नियामक प्रणाली में एकीकृत किया है।
राज्य सरकार का कहना है कि केवल धार्मिक शिक्षा अब पर्याप्त नहीं है और छात्रों को आधुनिक शैक्षणिक कौशल से लैस करने के लिए मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा के मानकों के अनुरूप होना चाहिए। नए आदेश के अनुसार, राज्य भर के सभी पंजीकृत मदरसों में अब स्कूल का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। इसके अलावा, स्कूलों पर लागू होने वाले सभी नियम और मानक अब इन मदरसों पर भी लागू होंगे। मदरसों को इस नई प्रणाली के अनुरूप होना होगा। उन्हें राष्ट्रीय शैक्षिक मानकों के अनुरूप एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम अपनाना होगा और आधुनिक विषयों की शिक्षा भी प्रदान करनी होगी।




