शंखनाद… गंगा के लिए चलेगा देशव्यापी जन-जागरण अभियान

भोपाल। देश की सबसे पवित्र नदी ‘गंगा’ की रक्षा के लिए 87 दिन से आमरण अनशन कर रहे जी.डी. अग्रवाल उर्फ स्वामी सानंद के समर्थन में देशव्यापी जन-जागृति अभियान चलाया जाएगा।

जन-जागरण अभियान

यह निर्णय रविवार को नई दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में शुरू हुए तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन लिया गया। भोपाल में जल-जन जोड़ो अभियान द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि गांधी शांति प्रतिष्ठान में देशभर के विभिन्न हिस्सों से जुटे गंगाप्रेमी इस अभियान के तहत गांव और शहरों में प्रभात फेरी, उपवास, मौन जलूस और गंगा सत्याग्रह होगा। यह आयोजन दिल्ली, देहरादून, लखनऊ, गोरखपुर, बनारस, पटना, रांची, कोलकाता, जयपुर, भोपाल, रायपुर, चंडीगढ़, जम्मू, हैदराबाद, बेंगलोर, पूना, मुंबई अहमदाबाद, भुवनेश्वर, गोवा, गुवाहाटी आदि स्थानों पर होंगे।

विज्ञप्ति के अनुसार, रविवार को देशभर के ग्यारह राज्यों से राजधानी के गांधी शांति प्रतिष्ठान में एकत्रित गंगा प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं पर्यावरण प्रेमियों द्वारा तीन दिन के गंगा सम्मेलन के पहले दिन इस आवाहन को सामूहिक स्वीकृति दी।

इन सभी ने सानंद स्वामी की सेहत के प्रति चिता जताई और सरकार से उनकी 10 अक्टूबर से जलत्याग की चेतावनी को गंभीरता से लेने की अपील की।

देश में ‘जलपुरुष’ के नाम से पहचाने जाने वाले राजेंद्र सिह के नेतृत्व में हुए सम्मेलन में प्रत्योश त्यागी, पूर्व अध्यक्ष, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सामाजिक कार्यकर्ता एवं वैज्ञानिक धन्नू राय, एस.के. गुप्ता, आईआईटी के कई स्नातकों एवं हरिद्वार मातृ सदन से स्वामी सांनद के गुरु स्वामी शिवानंद सरस्वती समेत देशभर के करीब 250 पर्यावरणविद एवं गंगाप्रेमी तीन दिन तक गंगा पर चिंतन के लिए उपस्थित रहेंगे।

सम्मेलन में राजेंद्र सिह ने कहा कि पिछले 87 दिन से वैज्ञानिक और संत प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद अनशन पर हैं। उनकी गंगा तपस्या लगातार जारी है। जिस तरह से स्वामी सानंद अपने प्राणों की बाजी लगाकर गंगा तपस्या कर रहे हैं, वह नदी एवं गंगा प्रेमियों के लिए चिता का विषय है।

उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद जिस गंगा के प्रारूप बिल को भारत की संसद में पारित कराना चाहते हैं, उस बिल पर सरकार की सहमति नहीं बन पा रही है और जो बिल सरकार ने बनाया है, उस पर स्वामी की सहमति नहीं है।

भारत के केंद्रीय प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष प्रत्योश त्यागी ने कहा कि सरकार ने गंगा को राष्ट्र नदी घोषित किया है, लेकिन राष्ट्र नदी के सम्मान और संरक्षण के लिए कोई कानून नहीं बनाए हैं। गंगा के लिए कानून को लागू करने की जरूरत है।

एकता परिषद के संस्थापक एवं देश में जल, जंगल, जमीन के अधिकारों की लड़ाई के अगुवा पी.वी. राजगोपाल ने कहा कि पूरी दुनिया में विकास के नाम पर पानी का दोहन और शोषण किया जा रहा है, दुनिया पानी के बिना उजड़ रही है, नदियों का अस्तित्व संकट में है, प्राकृतिक संसाधनों की हो रही लूट के सवाल पर समाज के सभी वर्गो को एक साथ आना होगा।

गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत ने कहा कि गंगा सबको संभालती है। संस्कृति का नाम है गंगा। गंगा और गाय को गांधी के रास्ते पर चलकर ही बचाया जा सकता है।

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जल जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिह ने कहा कि गंगा एक नदी नहीं, एक संस्कृति है। इसके संरक्षण के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि वास्तविक रूप से गंगा नदी के संरक्षण के ऊपर प्रयास करने की जरूरत है। इसके लिए आवश्यक है कि पूर्व में बनाए गए बिल के प्रारूप को लागू किया जाए।

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इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के समन्वयक जगदीश चौधरी ने कहा कि गंगा के आंदोलन को वह नगरीय क्षेत्र में ले जाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

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