जिला कारागार में कैदी ने आग लगाकर दी जान, परिजनों ने जेल प्रशासन पर लगाया गंभीर आरोप

अनुज कौशिक

जालौन के उरई जिला कारागार में एक कैदी ने आग लगा ली। कैदी को जलता हुआ देख जेल प्रशासन आनन-फानन में उसे इलाज के लिये जिला अस्पताल लाया गया। लेकिन उसकी मौत हो गई।

जिला कारागार

घटना की जानकारी जब म्रतक के रिशतेदारों को हुई तो, वह मौके पर पहुंचे और उन्होने जेल प्रशासन पर उत्पीड़न का आरोप लगाया साथ ही इस मामले की मजिस्ट्रेट जांच की मांग की।

मामला उरई जिला कारागार का है। जहां पर अपने पुत्र की मौत के मामले में उरई के राजेन्द्र नगर निवासी मूलचंद्र प्रजापति कई दिनों से बंद था। रात्रि के समय उसने बैरक की बाथरूम में जाकर खुद को आग के हवाले कर लिया।

आग जलते देख बैरक में बंद कैदियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। कैदियों का शोर सुनते ही जेल के कर्मचारी बैरक में पहुंचे और उन्होने मूलचन्द्र को आग से झुलसा देख उसकी आग बुझाई और आनन-फानन में उसे इलाज के लिये जिला अस्पताल ले आये।

जहां गंभीर हालत देख चिकित्सकों ने इलाज शुरू कर दिया। लेकिन कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। घटना की जानकारी जब म्रतक के परिजन और रिश्तेदारों को हुयी। वह मौके पर पहुंचे और उन्होने जेल प्रशासन पर प्रताड़ित और लापरवाही का आरोप लगाया।

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म्रतक कैदी के रिश्तेदार ने बताया कि मूलचन्द्र को उसके लड़के की मौत के आरोप में जेल भेजा गया था। मूलचन्द्र के लड़के ने कुछ समय पहले आग लगाकर जान दे दी थी। इस मामले में लड़के के ससुराल वालों ने उसके पिता को ही दोषी बना दिया था जिस आरोप में वह बंद था।

इस मामले में उरई जेल के जेलर अवध नारायण का कहना है कि कैदी ने खुद आग लगाई है। जब उनसे पूछा गया कि मिट्टी का तेल और माचिस कहां से आई, तो सफाई देते हुये उन्होने कहा कि माचिस तो बीड़ी पीने के लिये कैदी के पास रहती है।

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लेकिन मिट्टी का तेल उसके पास नहीं था उसने बिना तेल के आग लगाई और इसकी पूरी जानकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद खुल जाएगी। जेल में कैदियों की मौत पर जेल प्रशासन पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गए है।

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