
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां मांडा जैसे ग्रामीण इलाके में एक संगठित ड्रग सिंडिकेट और कथित ड्रग्स फैक्ट्री का संचालन बेखौफ किया जा रहा था। इस बड़े अवैध कारोबार का पर्दाफाश स्थानीय पुलिस ने नहीं, बल्कि मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने किया है।
मुंबई से आई इस विशेष टीम ने मांडा इलाके में अचानक छापेमारी करते हुए करोड़ों रुपये की प्रतिबंधित ड्रग्स बरामद की है। इस सफल ऑपरेशन के दौरान क्राइम ब्रांच ने मौके से सिंडिकेट से जुड़े आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जिन्हें आगे की गहन पूछताछ और कानूनी कार्रवाई के लिए महाराष्ट्र पुलिस अपने साथ ले गई है। इस पूरी घटना की विस्तृत जानकारी महाराष्ट्र पुलिस द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सार्वजनिक की गई, जिसके बाद से प्रयागराज महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
इस बड़े खुलासे के बाद सबसे बड़ा और गंभीर सवाल प्रयागराज की स्थानीय पुलिस और उनके खुफिया तंत्र (इंटेलिजेंस) की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। यह बेहद हैरानी की बात है कि मांडा के ग्रामीण इलाके में इतने बड़े पैमाने पर ड्रग्स का काला कारोबार चल रहा था और स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। इस घटना ने साबित कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर पुलिस का सूचना तंत्र पूरी तरह से विफल रहा।
यह सवाल भी स्वाभाविक रूप से खड़ा हो रहा है कि जब एक अंतर्राज्यीय सिंडिकेट प्रयागराज में अपनी जड़ें इतनी मजबूती से जमा चुका था, तो समय रहते स्थानीय स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। आखिर क्यों महाराष्ट्र से मुंबई क्राइम ब्रांच को आकर यह भंडाफोड़ करना पड़ा, यह बात पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गहरा दाग लगाती है।
इस घटनाक्रम के सामने आते ही प्रयागराज पुलिस विभाग में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है। मामले की संवेदनशीलता और पुलिस की घोर लापरवाही को देखते हुए प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने बेहद सख्त कदम उठाया है। उन्होंने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए प्रयागराज की पूरी स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) टीम को ही भंग कर दिया है।
कमिश्नर की इस कड़ी कार्रवाई ने स्थानीय पुलिस की जवाबदेही और उनकी भूमिका को लेकर चल रही बहसों को और भी तेज कर दिया है। अब इस बात की भी गहराई से जांच की जा रही है कि क्या इस रैकेट को स्थानीय स्तर पर किसी का संरक्षण प्राप्त था। मामले के तार कई राज्यों से जुड़े होने और इसकी व्यापकता को देखते हुए अब इस पूरे प्रकरण की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) से सौंपे जाने की मांग और अटकलें भी तेजी से उठने लगी हैं।




