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कर्नाटक: फ्लोर टेस्ट के लिए भाजपा के बोपैया बने प्रोटेम स्पीकर, भड़की कांग्रेस

नई दिल्ली। कर्नाटक का चुनावी रण थमने का नाम नहीं ले रहा है। जहां एक तरफ राज्य में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के बीच जोरदार बहस चल रही है। वहीँ दूसरी तरफ भाजपा ने नवगठित विधानसभा के संचालन हेतु अस्थायी (प्रोटेम) स्पीकर के लिए पार्टी के विधायक केजी बोपैया को चुना है।

 

कोम्बारना गणपति बोपैया

दरअसल, कर्नाटक में नवनिर्वाचित बीएस येदियुरप्पा सरकार को अब शनिवार शाम 4 बजे अपना बहुमत साबित करना है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा बहुमत साबित कर पाएगी। या फिर उसे सूबे की सत्ता से वंचित रहना पड़ जायेगा।

वहीँ इससे पहले ऐसी खबर थी कि कर्नाटक विधानसभा के सचिव ने विधानसभा के अस्थायी (प्रोटेम) स्पीकर के लिए दो विधायकों के नाम दिए हैं। इनमें एक उमेश कट्टी और दूसरा आरवी देशपांडे का नाम शामिल था।

ये नाम संसदीय कार्य विभाग को भेजा गए थे। उमेश कट्टी बीजेपी के विधायक हैं और आरवी देशपांडे कांग्रेस के विधायक हैं। दोनों अपनी-अपनी पार्टियों के वरिष्ठ विधायक हैं। वहीँ अब ख़बरों के मुताबिक, राज्यपाल ने केजी बोपैया को इस विशेष सत्र के लिए प्रोटेम स्पीकर चुना है।

आखिर कौन हैं बोपैया

भाजपा विधायक बोपैया का पूरा नाम है कोम्बारना गणपति बोपैया और वह चौथी बार विधायक चुने गए हैं। साथ ही पूर्व स्पीकर भी रहे हैं। वह विराजपेट विधानसभा क्षेत्र से लगातार 3 बार चुनाव जीतने में कामयाब रहे हैं। इस बार का चुनाव भी उन्होंने इसी सीट से जीता है। उनका संघ परिवार से गहरा नाता रहा है और स्कूली दिनों से इससे जुड़े रहे हैं। वह छात्र संगठन एबीवीपी से भी जुड़े रहे।

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बता दें बोपैया 2009 में वह 4 दिन के लिए प्रोटेम स्पीकर रहे और इस दौरान बीजेपी ने बहुमत हासिल किया था।

नियुक्ति पर कांग्रेस ने उठाये सवाल

प्रोटेम स्पीकर को लेकर राज्यपाल के फैसले पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उन्हें बोपैया प्रोटेम स्पीकर के रूप में स्वीकार्य नहीं होंगे। हम इस पर शीध्र कोई एक्शन लेंगे। हमें जानकारी मिली थी कि देशपांडे सबसे वरिष्ठ विधायक हैं। हमारे पास सभी विकल्प खुले हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव की 222 सीटों पर आए नतीजों में बीजेपी को 104 सीटें मिली हैं, जो कि बहुमत से 8 विधायक कम है। कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 37, बसपा को 1 और अन्य को 2 सीटें मिली हैं। ऐसे में बीजेपी भले ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी हो, लेकिन बहुमत से वो दूर है।

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राज्यपाल ने राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया और बीएस येदियुरप्पा ने गुरुवार को तीसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली। राज्यपाल ने नई सरकार को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन की मोहलत दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने घटाकर शनिवार तक कर दिया।

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