
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए 2026 की शुरुआत निराशाजनक रही। श्रीहरिकोटा से आज सुबह 10:17 बजे PSLV-C62 (PSLV-DL वैरिएंट) का 260 टन वजनी रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ और पहले दो स्टेज तथा सेपरेशन तक सब कुछ सामान्य रहा। पूरे देश ने इस रोमांचक लॉन्च को देखा, लेकिन तीसरे स्टेज (PS3) के अंत में अनियमितता सामने आई।
ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने पुष्टि की कि तीसरे स्टेज के अंत में रोल रेट्स में डिस्टर्बेंस और फ्लाइट पाथ में विचलन देखा गया। टेलीमेट्री अपडेट्स रुक गए और ऑर्बिट इंसर्शन फेल हो गया। यह स्थिति पिछले साल मई 2025 में हुए PSLV-C61 मिशन से मिलती-जुलती है, जहां भी तीसरे स्टेज में चैंबर प्रेशर ड्रॉप के कारण EOS-09 सैटेलाइट खो गया था।
इस मिशन में DRDO का मुख्य सैटेलाइट EOS-N1 (Anvesha) था, जो समुद्री निगरानी के लिए हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग करता है। इसके अलावा 15 को-पैसेंजर सैटेलाइट्स शामिल थे, जिनमें भारतीय स्टूडेंट पेलोड्स, प्राइवेट फर्म एक्सपेरिमेंट्स, नेपाल, स्पेन, ब्राजील, थाईलैंड, फ्रांस और UK से सैटेलाइट्स, तथा स्पेन का KID री-एंट्री डेमॉन्स्ट्रेटर शामिल था। लक्ष्य 505 किमी सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट था।
तीसरे स्टेज की समस्या के कारण रॉकेट अपनी निर्धारित गति और ट्रैजेक्टरी तक नहीं पहुंच सका, जिससे सभी 16 सैटेलाइट्स की संभावित हानि हो गई है। ISRO ने डेटा एनालिसिस शुरू कर दिया है और फेलियर एनालिसिस कमिटी जांच करेगी।
यह PSLV की 8 महीनों में दूसरी दुर्लभ असफलता है, जिससे इसकी 94% सफलता की छवि पर असर पड़ा है। पहले 63 फ्लाइट्स में चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-L1 जैसे मिशन सफल रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि सॉलिड-फ्यूल मोटर, नोजल या कैसिंग की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं, खासकर 2026 की व्यस्त शेड्यूलिंग के बीच।
NSIL के जरिए कमर्शियल राइडशेयर मिशन्स पर भरोसा कम हो सकता है, जो भारत के प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम के विकास को प्रभावित करेगा। यह झटका ISRO के 2026 के लक्ष्यों जैसे 100+ सैटेलाइट लॉन्च, NavIC विस्तार और गगनयान तैयारी को चुनौती देगा। हालांकि PSLV का मॉड्यूलर डिजाइन तेजी से सुधार की उम्मीद देता है। ISRO टीम रिकवरी के लिए प्रतिबद्ध है और LVM3 जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।




