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ये रिपोर्ट उड़ा देगी होश, खिसक जाएगी जमीन, परमाणु शक्ति का इस्तेमाल करेंगे आतंकी!

वाशिंगटन। पास्कितान को हमेशा से आतंक का पनाहगार माना जाता रहा है। हालांकि हर बार ऐसे आरोपों को खारिज करते हुए पाकिस्तान खुद को पाक साफ़ बताता रहा है। हाल ही में अमेरिका द्वारा दी जाने वाली मदद पर रोक लगने का भी यही कारण चर्चा में आया था। इसके बाद पाकिस्तान ने अपनी सफाई में कहा था कि हमें नाम और इज्जत चाहिए इसके अलावा उसे किसे से कोई दरकार नहीं। मामला साफ़ था कि पाक अमेरिका को बंद बातों में यह जताना चाहता था कि उसके द्वारा की गई कार्रवाई साफ़ तौर पर गलत है। ऐसे में ताजा मामला एशियाई देशों के लिए बड़ी मुसीबत की दस्तक दे रहा है, जो वाकई में चिंता का विषय है।

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बरसेगा का कहर

खबरों के मुताबिक़ परमाणु हथियार के मामले में पाकिस्तान के बढ़ते कदम भविष्य में आने वाले बड़े संकट की ओर इशारा कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के पास जल्द ही दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एटमी हथियार का भंडार होगा।

बता दें एक न्यूज एजेंसी ने सैन्य इतिहास और वैश्विक मामलों के एक जानकार के हवाले से यह दावा किया है।

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उसका कम ताकत (5 से 10 किलोटन) वाले एटमी हथियारों की तैनाती का फैसला दक्षिण एशियाई देशों की स्थिरता को खतरे में डालने वाला है।

एक रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि न्यूक्लियर शक्ति में सबसे आगे रूस है, जिसके पास 6800 न्यूक्लियर बम मौजूद हैं। वहीं दूसरे पायदान पर अमेरिका है जिसके जखीरे में 6600 बम हैं।

इन दोनों महाशक्तियों के बाद तीसरा सबसे ताकतवर देश फ्रांस है जिसके पास 300 बम हैं। इन तीन के बाद चीन 270, यूके 215, पाक 140, भारत 130 और इजराइल के पास 80 बम हैं।

मामले को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि पाकिस्तान के इस दिशा में बढ़ते हुए कदम आतंकियों को परमाणु शक्तियों का मालिक बना सकती हैं।

सैन्य इतिहास के बेस्टसेलर लेखक जोसफ वी मिकलेफ ने पाकिस्तान के इस कदम से अपने लेख में सभी को आगाह किया है।

उनका मानना है कि अगर पाकिस्तान लगातार इस ओर बढ़ता रहा तो एटमी हथियार जिहादी और आतंकी संगठनों के हाथ लगने का खतरा बढ़ सकता है।

जोसफ अपने लेख में लिखते हैं कि पाकिस्तान का तालिबान, तहरीक-ए-जिहाद इस्लामी, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे आतंकी संगठनों से रिश्ता रहा है।

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अलकायदा समर्थित अंसार गजवत-उल-हिंद का नाम भी भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देने में आता रहा है।

वहीं लेखक ने इस बात पर चिंता जताई है कि पाकिस्तान बीते 48 सालों से लगातार गुपचुप तरीके से एटमी हथियार बना रहा है।

लेखक के मुताबिक, पाकिस्तान और दुनिया के दूसरे हिस्सों में इन हथियारों का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।

अपनी बातों में जोसफ ने चीन की मदद का भी जिक्र किया। जोसफ के मुताबिक, चीन मिसाइल बनाने में पाकिस्तान की मदद करता कर रहा है।

उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से कहा है कि पाकिस्तान के पास इस वक्त 140 से 150 एटमी हथियार हैं।

माना जा रहा है कि पाकिस्तान एटमी हथियार बनाने के लिए 3 से 4 हजार किलो संवर्धित यूरेनियम और 200 से 300 किलो तक प्लूटोनियम का भंडार कर चुका है।

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