
नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में इकोनॉमिक सर्वे को पेश किया है. इस सर्वे में साल 2018 में अर्थव्यवस्था की रफ़्तार 6.75 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा बजट सत्र शुरू करने के बाद ये रिपोर्ट पेश की गई है.

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2019 में अर्थव्यवस्था की रफ़्तार बढ़ेगी जो 7 से 7.75 फीसदी तक पहुंच सकती है. इस सर्वेक्षण के जरिये इकोनॉमी को लेकर कई सुझाव भी सरकार को दिए जाते हैं.
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सर्वे में बताया गया है कि देश का इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट बढ़ रहा है. बिजनेस में सुधार जारी है जो 2018 में और अच्छा हो जाएगा.
सर्वे में कहा गया है आने वाले दिनों में आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर अर्थव्यवस्था का प्रबंधन करना बड़ी चुनौती रहेगी. अगर सरकार वित्तीय दायरे और अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद खतरों को नजरअंदाज कर कोई बड़ी घोषणा करती है, तो ऐसी घोषणाएं किसी भी तरह से जीत नहीं होगी.

इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि जीएसटी की वजह से अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां खड़ी हुईं. ये नई कर व्यवस्था सरकारी की नीतियों के सामने चुनौती बनी. इससे सूचना प्रसारण तकनीक के लिए भी राह मुश्किल रही.
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रिपोर्ट के मुताबिक़, जीएसटी का सबसे ज्यादा असर इंफोर्मल सेक्टर पर पड़ा. हालांकि, सरकार ने त्वरित निर्णय लिए और इसकी दिक्कतों को भी दूर करने की कोशिश की गई.
सर्वे के मुताबिक आने वाले वक्त में निर्यात अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने का काम कर सकता है. भारत का निर्यात बढ़ने से वैश्विक विकास की रफ्तार बढ़ेगी और इसका फायदा अर्थव्यवस्था को होगा.
इकोनॉमिक सर्वे में अनुमान
आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट आने से पहले अपनी प्रतिक्रिया देते हुए वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने साफ़ कहा कि 2018 में जीडीपी ग्रोथ 2017 के मुकाबले बेहतर होगा.
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उन्होंने कहा कि इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन बढ़ रहा है. एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी हो रही है. बिजनेस में सुधार हुआ है और मुझे उम्मीद है 2018 में और सुधार होगा.
क्या है इकोनॉमिक सर्वे
आर्थिक सर्वेक्षण अथवा इकोनॉमिक सर्वे पिछले साल बांटे गए खर्चों का लेखाजोखा तैयार करता है. इससे पता चलता है कि सरकार ने पिछले साल कहां-कहां कितना खर्च किया. सर्वेक्षण से यह भी पता चलता है कि पिछले साल अर्थव्यवस्था की स्थिति कैसी रही.




