चित्र नहीं चरित्र की पूजा करें : बाबा रामदेव

प्रसन्नता अंदर से आती है, ना कि बाहर से।  बुढ़ापा कोई उम्र नहीं है, यह तो हमारी सोच का परिणाम है। विचारों में शुद्धीकरण ही मात्र एक नैतिकता है। आरोग्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। विचारों और विश्वास में शुद्धता व नियंत्रण ही सफलता की  बाधा  है।

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कर्म ही मेरा धर्म है, कर्म ही मेरा पूजा है और कर्म ही इस संसार का सत्य और जीवन है। खाने के बाद किसी को भी सोना नहीं चाहिए क्योंकि इस से मोटापा बढ़ता है। सभी बीमारियों का इलाज योग में और अच्छी जीवनशैली में निहित है।

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नकारात्मक विचार, दिमागी की विकारों के कारण है। आयुर्वेद, कला और विज्ञान का मेल है। प्रेम, वासना नहीं उपासना है। वासना का उत्कर्ष , प्रेम की हत्या है ।  प्रेम, समर्पण एवं विश्वास की पराकाष्ठा है। हमारा जीना व दुनिया से जाना दोनों ही गौरवपूर्ण होना चाहिए।

ज्ञान का अर्थ मात्र जानना नहीं, वैसा हो जाना है। बड़ा काम करने का साहस करो।  छोटे उद्देश्य के लिए जीना, जीवन का अपमान है।

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सफलता का सिद्धांत है। व्यक्ति नहीं व्यक्तित्व की पूजा करें। चित्र नहीं चरित्र की पूजा करें। कर्म को अपना धर्म माने और राष्ट्रधर्म को सबसे ऊपर माने।

जिंदगी में कभी भी कोई गलत काम मत करो। ना भगवान के विधान को तोड़ो, ना देश के संविधान को तोड़ो, ना अपनी आत्मा के बाद के खिलाफ चलो।

फिर उसके बाद चाहे आपको पूरी दुनिया से लड़ ना हो तो भी आप को कोई भय नहीं होगा। अच्छे कामो में सहयोग करो, सहयोग नहीं कर सकते तो कम से कम असहयोग मत करो।

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