
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बन रहे महत्वाकांक्षी ‘साइंस सिटी’ प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार की ओर से बड़ी आर्थिक सौगात मिली है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के काम में तेजी लाने और इसे जल्द से जल्द पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने 14 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि को अपनी मंजूरी दे दी है।
इस कदम से विज्ञान और नवाचार को समर्पित इस परियोजना के समय पर पूरा होने की उम्मीदें मजबूत हो गई हैं। यह साइंस सिटी राज्य के युवाओं और छात्रों को आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान से सशक्त बनाने और उनमें नई सोच विकसित करने में एक अहम भूमिका निभाएगी।
राज्य सरकार द्वारा साझा की गई विस्तृत जानकारी के अनुसार, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक पत्र के माध्यम से इस अतिरिक्त फंड की स्वीकृति की जानकारी दी है। दरअसल, इस पूरे प्रोजेक्ट में लगभग 39 करोड़ रुपये के ‘गैप फंडिंग’ यानी अतिरिक्त धन की आवश्यकता महसूस की गई थी।
अब इस कमी को दूर करने के लिए केंद्र ने अपनी हिस्सेदारी के तौर पर 14 करोड़ रुपये देने का फैसला किया है। शेष बचे हुए लगभग 25 करोड़ रुपये की व्यवस्था उत्तराखंड सरकार और उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा संयुक्त रूप से की जाएगी।
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह महत्वपूर्ण निर्णय परियोजना की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में सामने आए तथ्यों और निष्कर्षों के आधार पर लिया गया है। इस अतिरिक्त धनराशि का उपयोग मुख्य रूप से उन नए और अत्यंत आवश्यक घटकों के निर्माण में किया जाएगा, जिन्हें बाद में प्रोजेक्ट में शामिल किया गया था और जिनकी वजह से लागत में वृद्धि हुई थी।
राज्य सरकार के अनुसार, मूल परियोजना की तरह ही इस अतिरिक्त फंडिंग में भी केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात का नियम लागू रहेगा। इस स्पष्ट वित्तीय ढांचे के तय हो जाने से निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सकेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अहम फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का हृदय से आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि साइंस सिटी का निर्माण पूरा होने के बाद, यह उत्तराखंड के छात्रों, युवाओं और विज्ञान के प्रति गहरा लगाव रखने वाले सभी लोगों के लिए आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान और नवाचार का एक उत्कृष्ट केंद्र बनेगा।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य ही वैज्ञानिक शिक्षा को बढ़ावा देना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां तकनीकी और तार्किक रूप से अधिक मजबूत बन सकें और राज्य में शोध व अनुसंधान का एक बेहतर माहौल तैयार हो सके।



