
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बार फिर कूटनीतिक पटल पर अपनी सूझबूझ और दूरदर्शिता का परिचय दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान, जब वे मुंबई के ऐतिहासिक ताज महल पैलेस होटल में 26/11 स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे, तो जयशंकर ने यह सुनिश्चित किया कि रुबियो को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की खौफनाक सच्चाई का सीधा और गहरा अहसास हो।
इस संवेदनशील अवसर पर जयशंकर ने रुबियो की मुलाकात ताज होटल के सुरक्षा प्रमुख सुनील कुडियाडी से करवाई। कुडियाडी 2008 के उस भयानक आतंकवादी हमले के प्रत्यक्षदर्शी और उन अनसुने नायकों में से एक हैं, जिन्होंने लगभग 60 घंटे तक चले उस खौफनाक मंजर को अपनी आंखों से देखा था और उसमें लोगों की जान बचाई थी।
सुनील कुडियाडी ने अमेरिकी विदेश मंत्री को उस हमले का सिलसिलेवार और रोंगटे खड़े कर देने वाला ब्योरा दिया। उन्होंने रुबियो को बताया कि किस तरह आतंकवादी आधी रात को रसोई के रास्ते दाखिल होकर छठी मंजिल तक पहुंच गए थे और वहां भारी खून-खराबा किया था। इस भीषण घेराबंदी के दौरान ताज होटल के 31 कर्मचारियों और प्रशिक्षुओं को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
कुडियाडी, जो उस समय निहत्थे थे, ने होटल की जटिल भौगोलिक बनावट की अपनी गहरी जानकारी का उपयोग करते हुए मरीन कमांडो (MARCOS) और पुलिस बल का मार्गदर्शन किया था। उनके अदम्य साहस और समझदारी की वजह से ही कई लोगों की जान बचाई जा सकी थी। विदेश मंत्री जयशंकर ने रुबियो को यह भी याद दिलाया कि किस तरह होटल के कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना मेहमानों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा और अंत तक होटल में ही डटे रहे।
इस छोटी लेकिन बेहद प्रभावकारी मुलाकात के बहुत गहरे कूटनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। वर्तमान में अमेरिका का डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान के साथ अपने रणनीतिक और व्यापारिक संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जो स्वाभाविक रूप से भारत के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में जयशंकर द्वारा कुडियाडी के माध्यम से 26/11 के खौफनाक हमले की सच्चाई बयां करवाना एक बहुत ही सधी हुई और स्मार्ट कूटनीतिक चाल मानी जा रही है।
इसके जरिए भारत ने अमेरिका को बहुत ही स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है कि सीमा पार से होने वाले आतंकवाद की मासूम लोगों को क्या कीमत चुकानी पड़ती है। जयशंकर ने इसके बाद यह दोटूक बयान भी दिया कि भारत अपने साझेदारों से आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहिष्णुता) की उम्मीद करता है और आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार रखता है।
हालांकि, मार्को रुबियो ने पाकिस्तान के साथ अमेरिका की बढ़ती नजदीकियों का बचाव करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान एक परमाणु संपन्न देश है और उसकी भौगोलिक स्थिति के कारण अमेरिका को उसके साथ बातचीत और संबंध बनाए रखने पड़ते हैं। रुबियो का तर्क था कि इन संबंधों के जरिए अमेरिका को वह कूटनीतिक लाभ मिलता है, जिससे वह पाकिस्तान पर ऐसा दबाव बना सके कि वह उन गतिविधियों को रोके जो भारत के लिए चिंताजनक हैं।
इसके बावजूद, रुबियो ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद और उसे प्रायोजित करने वालों के सख्त खिलाफ है। कुल मिलाकर, 26/11 स्मारक पर हुआ यह पूरा घटनाक्रम भारत की उस दृढ़ विदेश नीति को दर्शाता है, जिसमें वह आतंकवाद के मुद्दे पर किसी भी महाशक्ति के सामने अपनी चिंताओं को प्रमुखता से रखने में संकोच नहीं करता।



