मुश्किलों से बने तीन तलाक को चुटकियो में खत्म कर देना चाहती है कांग्रेस

आज कांग्रेस पार्टी की एक नेता ने कहा कि अगर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता में आती है तो वह तीन तलाक कानून खत्म कर देगी। कांग्रेस के इस बयान को अल्पसंख्यकों के सांप्रदायिक तुष्टीकरण के तौर पर देखा जा रहा है। इस बयान के सियासी फायदे और नुक्सान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि कांग्रेस ने पूरी रणनीति के तहत यह बयान अपने एक नेता से दिलवाया है।

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भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता जफर इस्लाम ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि वोटों की लालच में देश का एक सियासी दल ऐसी प्रथा को अपनी सहमति दे रहा है जिसकी वजह से समाज में अनगिनत महिलाओं और बच्चों का जीवन हमेशा के लिए बर्बाद हो जाता है। जफर इस्लाम के मुताबिक कांग्रेस ने इसके जरिए एक बार फिर शाहबानो प्रकरण की याद ताजा करा दी है। लेकिन आज का समाज बदल चुका है और वे उम्मीद करते हैं कि मुस्लिम समाज ही कांग्रेस को सबक सिखाएगा।

वहीं, अल्पसंख्यक समाज से आने वाले कांग्रेस के शीर्ष नेता राशिद अल्वी ने कहा कि पार्टी की बात को गलत ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी तीन तलाक कानून के खिलाफ नहीं है। लेकिन हम इस कानून के उस ‘अपराधीकरण’ के खिलाफ हैं जिसके तहत तीन तलाक देने वाले पुरुष को जेल में डाल देने का प्रावधान किया गया है। पार्टी सांसद सुष्मिता देव के बयान का चुनाव में क्या राजनीतिक असर होगा, यह पूछने पर अल्वी ने कहा कि यह एक बड़ा मसला है और इसे सिर्फ चुनावी गतिविधि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

तीन तलाक पीड़िता ने कहा- कांग्रेस को होगा नुकसान

‘मेरा हक फाउंडेशन’ नाम से एक संगठन चला रहीं फरहत नकवी स्वयं तीन तलाक पीड़ित महिला हैं। अपने एक मासूम बेटे के साथ तीन तलाक का दंश वे लंबे समय से झेल रही हैं। वे चाहती हैं कि तीन तलाक पर कड़ा कानून बनाया जाए जिससे इसके कारण किसी महिला का जीवन खराब न हो। कांग्रेस के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए फरहत ने कहा कि कांग्रेस ने आज यह साबित कर दिया कि वह धर्म के नाम पर मुस्लिमों के तुष्टीकरण से ज्यादा कुछ नहीं कर सकती।
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उन्होंने कहा कि कांग्रेस को समझना पड़ेगा कि आज का मुसलमान अस्सी के दशक का मुसलमान नहीं है। समाज ने बहुत प्रगति की है और वह इस कानून के लाभ-नुकसान पर बहस कर रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने इस सोच के कारण नुक्सान उठाना पड़ेगा क्योंकि हर तीन तलाक पीड़ित महिला के साथ उसका पूरा परिवार खड़ा होता है। उसके इस रुख के कारण उसे उन परिवारों के वोट नहीं मिलेंगे।

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