
उत्तराखंड में हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद सभास्थल पर कथित शुद्धिकरण यज्ञ विवाद पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिक्रिया दी है। धामी ने कहा कि कांग्रेस इस घटना को ‘दलित एंगल’ देने की कोशिश कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में बांटने वाली राजनीति का कोई स्थान नहीं है।
सीएम धामी ने कहा, “देवभूमि उत्तराखंड में कभी भी वर्ग, क्षेत्र और जाति की बात किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती। इस तरह एकदम से नैरेटिव बनाने के लिए ये सब करना कांग्रेस की बहुत बड़ी विफलता, हताशा और निराशा है। जिस पार्टी के लोगों ने कभी डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न नहीं देने दिया और उन्हें संसद में नहीं पहुंचने दिया, बाबू जगजीवन राम और सीताराम केसरी के साथ जिस तरह का व्यवहार किया, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंबेडकर के पंचतीर्थ को सम्मानित किया गया और उनकी सोच को धरातल पर उतारा गया।”
उन्होंने आगे कहा कि खरगे और कांग्रेस का दलित एंगल देना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। वहां धार्मिक उन्माद के नारे लगाए गए थे, जिसके बाद स्वयंसेवी धार्मिक संगठनों ने शुद्धिकरण किया। शुद्धिकरण इसलिए किया गया क्योंकि वह स्थान रामलीला का पवित्र मंचन स्थल है, जहां हर साल धार्मिक आयोजन होते हैं। कार्यक्रम के बाद खाली बोतलें, पेशाब भरी बोतलें और गंदगी मिली थी। इसलिए शुद्धिकरण किया गया।
सीएम ने कहा कि हमारा विरोध राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी से नहीं है, बल्कि उनके वंदे मातरम् विरोध, राष्ट्रभक्ति की कमी और सैनिकों से सर्जिकल स्ट्राइक का हिसाब मांगने जैसे रवैये से है।
क्या है पूरा मामला?
मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास नाम के संगठन ने रामलीला मैदान पहुंच हवन किया और गंगाजल छिड़का था। संगठन के अध्यक्ष गिरीश पांडे ने स्पष्ट किया कि शुद्धिकरण इसलिए किया गया क्योंकि रामलीला मैदान धार्मिक आयोजनों के लिए निर्धारित है, लेकिन वहां राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य किसी जाति या समुदाय को निशाना बनाना नहीं था।



