Bhai Dooj 2018: जानें भाई को तिलक करने की विधि और तरीके के साथ शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में रिश्तों को बहुत अहमियत दी गई है। कोई भी रिश्ता हो उस रिश्तें में बंधकर रहना और जीना सिखाया गया है। रिश्ता चाहें पति-पत्नी का हो या फिर भाई और बहन का यहां पर हर किसी के लिए सांस्कृति और परंपरा है। दिपावली के दूसरे दिन मनाया जाने वाले भाई दूज भी इसी परंपरा का हिस्सा है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाई जाती है। इस साल त्योहार आज यानी कि 9 नवंबर को मनाया जा रहा है।

भाईदूज

इस त्योहार के दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उनके उज्ज्वल भविष्य और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई दूज या भैया दूज का यह त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को मनाया जाता है।

शास्त्रों के अनुसार कार्तिक में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को अपराह्न यानी दिन के चौथे भाग में भाई दूज मनाई जानी चाहिए। माना जाता है कि अगर अपराह्न के वक्त द्वितीया तिथि लग जाए तो उस दिन भाई दूज नहीं मनानी चाहिए. मान्यता के अनुसार ऐसे में भाईदूज अगले दिन मनानी चाहिए। हां, अगर ऐसा हो जाए कि अपराह्न के वक्त द्वितीया तिथि नहीं लगे तो भाई दूज या भैया दूज अगले दिन मनाई जाती है। वहीं, कुछ लोग कार्तिक शुक्ल पक्ष में मध्याह्न यानी दिन के तीसरे भाग में प्रतिपदा तिथि शुरू होने पर भाईदूज मनाते हैं।

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शुभ मुहूर्त

शुभ मुहूर्त शुरू- दोपहर 1:10 मिनट
शुभ मुहूर्त समाप्त- दोपहर 3:27 मिनट
शुभ मुहूर्त की अवधि- 2 घंटे 17 मिनट

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पूजा विधि

भाईदूज या भैया दूज की पूजा बहनों द्वारा की जाती है। इस दिन सबसे पहले नहा धोकर तैयार हो जाएं। फिर आटे का चौक तैयार कर लें। अगर आप व्रत करती हैं तो सूर्य को जल देकर व्रत शुरू करें। शुभ मुहूर्त आने पर भाई को चौक पर बिठाएं और उसके हाथों की पूजा करें। सबसे पहले भाई की हथेली में चावल का घोल लगाएं। फिर उसमें सिंदूर, पान, सुपारी और फूल वगैरह रखें। अंत में हाथों पर पानी अर्पण कर मंत्रजाप करें। इसके बाद भाई का मुंह मीठा कराएं और खुद भी मीठा खाएं। शाम के समय यमराज के नाम का दीया जरूर जलाएं।

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