मजदूर के रुप में पकड़ा गया बंग्लादेशी, आधार और पैन जैसे दस्तावेजों से है लैस

राजस्थान में एक संदिग्ध युवक पकड़ा गया है, जिसे बांग्लादेशी बताया जा रहा है। दरअसल भरतपुर जिले के भुसावर क्षेत्र में मजदूर के रुप में काम कर रहे संदिग्ध युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए संदिग्ध युवक को पुलिस ने बंगलादेशी नागरिक के रुप में पहचान किया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार सेना की गुप्तचर शाखा ने क्षेत्र के क्रेशर जोन स्थित विनायक स्टोन क्रेशर से शनिवार को मजदूर के रूप में कार्य कर रहे संदिग्ध बंगलादेशी नागरिक रजाउल खान (22) निवासी सताबगंज जिला दिनाजपुर, बंगलादेश को पकड़ा है।मिली जानकारी के अनुसार यह फर्जी तरीके से आधार कार्ड एवं पैन कार्ड बनवाकर क्रेशर प्लांट पर नौकरी कर रहा था। गिरफ्तार बंगलादेशी नागरिक को भुसावर पुलिस के हवाले किया गया है।

इस कार्यवाही के बाद जिले के अन्य क्रेशर जोन में हड़कंप मच गया। पुलिस के द्वारा पूछताछ किए जाने पर रजाउल ने बताया कि लगभग सात या आठ माह पहले भुसावर थाना क्षेत्र के बल्लभगढ़ निवासी ई-मित्र संचालक दीपक ने पांच हजार रुपये में उसे उत्तरप्रदेश का निवासी होना बताकर आधार कार्ड एवं पैन कार्ड बनवा कर दिए।

आधार कार्ड व पैन कार्ड बनने के बाद उसने दो मोबाइल सिम खरीदी और दोनों नंबरों से बदल बदल कर अपने पिता खोखा खान से बांग्लादेश के मोबाइल नम्बर एवं दोस्त सोजित, बहन जिन्नातुल के मोबाइल नंबर तथा आलम नामक बांग्लादेशी नागरिक से लगातार बात करता रहा।

प्रथम दृष्टया उसने बताया कि करीब आठ साल पहले 13 साल की उम्र में वह आर्थिक हालात खराब होने के कारण भारत सीमा पर एक दलाल के सम्पर्क में आया जो उसे बॉर्डर क्रॉस कराकर दिल्ली लाया। फिर हरियाणा के मेवात क्षेत्र के ताबडू सोना में एक क्रेशर पर मुनीम से आठ-नौ हजार रुपये लेकर उसे उनके हवाले पर छोड़ गया।

उसके बाद वह राजस्थान के करौली, मध्यप्रदेश के ग्वालियर आदि जगहों पर क्रेशरों पर कार्य करने के बाद भरतपुर जिले के रुदावल फिर भुसावर क्षेत्र के विनायक स्टोन क्रेशरों पर कार्य करने लगा।

गौरतलब है कि अब यह जानकारी जुटाई जा रही है कि जिले के अलग अलग क्षेत्रों में क्रेशरों पर भारतीय आधार कार्ड एवं पैन कार्ड बनवाकर बिना पुलिस जांच कराए कितने और विदेशी नागरिक रह रहे है ,जो देश की सुरक्षा को खतरा बन सकते हैं। वहीं जिले के ऐसे मोबाइल टावरों की डिटेल भी खंगाली जा रही है जिन टावरों से विदेशों में बात की गई है।

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