
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के सिकंदराबाद ग्रामीण क्षेत्र से एक बेहद भावुक और समाज को आईना दिखाने वाली घटना सामने आई है, जिसने बॉलीवुड की मशहूर फिल्म ‘बागबान’ की दर्दनाक यादें ताजा कर दी हैं। यहां 51 सालों तक जीवन के हर सुख-दुख में एक-दूसरे का साया बनकर रहने वाले एक बुजुर्ग दंपति को उनके ही चार बेटों ने बेदर्दी से आपस में बांट लिया।
बेटों द्वारा तय की गई इस संवेदनहीन व्यवस्था के तहत दो बेटे अपनी 75 वर्षीय मां सत्यवती को अपने साथ ले गए, जबकि बाकी दो बेटों ने पिता को अपने पास रख लिया। जीवन के इस आखिरी पड़ाव में अपनों द्वारा किए गए इस अजीबोगरीब बंटवारे ने एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह बिखेर कर रख दिया।
उम्र के इस ढलान पर एक-दूसरे से अलग होने का दर्द यह बुजुर्ग दंपति सह नहीं सका। अलग-अलग रहने, बेटों की बेरुखी और संवादहीनता के कारण पति-पत्नी के बीच भी दूरियां और आपसी मनमुटाव लगातार बढ़ता चला गया। अंततः हालात इतने खराब हो गए कि 75 वर्षीय बुजुर्ग मां सत्यवती को न्याय और अपने हक की गुहार लगाने के लिए मजबूरन पुलिस की दहलीज तक पहुंचना पड़ा। उन्होंने पुलिस से न्याय की गुहार लगाते हुए अपने पति से कानूनी रूप से अलग रहने और सम्मानजनक जीवनयापन के लिए भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) दिलाने की मांग की। मामले की संवेदनशीलता और बुजुर्गों की पीड़ा को गहराई से समझते हुए पुलिस ने तत्काल इस प्रकरण को महिला थाना सेल में परिवार परामर्श (काउंसलिंग) के लिए स्थानांतरित कर दिया।
महिला सेल की प्रभारी अलका चौधरी की मौजूदगी में दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर उनकी सघन काउंसलिंग कराई गई। पुलिस और काउंसलर्स ने लंबी बातचीत के जरिए इस बुजुर्ग दंपति और उनके बेटों को समझाने का हरसंभव प्रयास किया, ताकि जीवन के इन अंतिम वर्षों में पति-पत्नी दोबारा एक ही छत के नीचे एक साथ रह सकें।
हालांकि, तमाम कोशिशों और भावुक अपीलों के बावजूद उनके बीच एक साथ रहने पर कोई भी सहमति नहीं बन पाई। अंततः दोनों पक्षों के बीच एक लिखित समझौते के तहत बुजुर्ग पति अपनी पत्नी सत्यवती को हर महीने 5,000 रुपये की भरण-पोषण राशि देने पर राजी हो गया है। खून के रिश्तों की इस बेरुखी और बुजुर्ग माता-पिता के इस दर्दनाक बिखराव की चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है, जो आज के आधुनिक समाज के गिरते पारिवारिक मूल्यों पर एक बड़ा सवालिया निशान छोड़ गई है।




