
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी के किनारे आयोजित भव्य हवाई प्रदर्शन को देखा, जिसमें भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की शक्ति और युद्ध क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। नमो घाट पर आयोजित यह हवाई प्रदर्शन, भारतीय वायु सेना के 94 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इस गुरुवार से शुरू हुए ‘विंग्स ओवर गंगा’ अभियान का हिस्सा था। प्रधानमंत्री के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, वायुसेना प्रमुख (सीएएस) एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
इस एयरशो में भारतीय वायु सेना की हवाई शक्ति की झलक दिखाई गई और यह भी प्रदर्शित किया गया कि ड्रोन और मानवरहित हवाई वाहनों (यूएवी) के युग में युद्धक्षेत्रों के लिए उसकी तैयारी कैसी है। कार्यक्रम में विशेष लड़ाकू जेट फॉर्मेशन, नकली हवाई युद्ध अनुक्रम, उन्नत सेंसर तकनीक और एरोबेटिक प्रदर्शन शामिल थे। इस आयोजन के दौरान, 12 हवाई अड्डों से सुखोई Su-30 MKI और राफेल जैसे लगभग 100 विमानों ने भाग लिया। इनके साथ-साथ हेलीकॉप्टर और परिवहन विमान भी प्रदर्शन के लिए रखे गए थे। इस एयरशो का उद्देश्य भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना के बीच घनिष्ठ समन्वय को प्रदर्शित करना भी था।
एयरशो का सबसे बड़ा आकर्षण तीर के आकार का गठन था जिसके तहत छह लड़ाकू जेट – Su-30, राफेल, जगुआर, मिराज 2000, LCA तेजस और मिग-29 – एक साथ उड़ान भर रहे थे, जो उनकी क्षमताओं, उनके पायलटों के कौशल और उनके सटीक समन्वय को प्रदर्शित कर रहे थे। इस एयरशो में विमानों की गति, मिशन के दौरान संरचना बनाए रखने और समन्वय स्थापित करने की क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रदर्शन में वास्तविक हथियारों से लैस विमान भी शामिल थे। इस आयोजन में पिछले वर्ष के ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल किए गए कुछ हथियारों से जुड़ी क्षमताओं की झलक भी दिखाई गई ।


