
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 17 अक्टूबर को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘विकसित उत्तराखंड – यात्रा जारी है’ संवाद कार्यक्रम के दौरान राज्य भर के उद्यमियों, नवप्रवर्तकों (इनोवेटर्स), किसानों और स्वरोजगार से जुड़े व्यक्तियों के साथ सीधा संवाद किया।
नियोजन विभाग और ‘देवभूमि डायलॉग’ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रतिभागियों के अनुभव, सफलता की कहानियां और सुझाव सुने तथा राज्य के विकास में उनके अभूतपूर्व योगदान की सराहना की।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार करने की दिशा में उत्तराखंड तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि राज्य गठन के समय पर्यटन और ऊर्जा को विकास के दो प्रमुख आधार स्तंभ माना गया था, जिनमें पिछले पांच वर्षों के भीतर उल्लेखनीय प्रगति हुई है। \
जलविद्युत क्षमता के दोहन के साथ-साथ पर्यटन क्षेत्र में स्वरोजगार के व्यापक अवसर खुले हैं। सीएम धामी ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों के सुखद परिणाम सामने आए हैं, जिसके चलते प्रदेश में पंजीकृत स्टार्टअप्स की संख्या पिछले पांच वर्षों में करीब 700 से बढ़कर 1,700 से अधिक पहुंच गई है।
संवाद के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों से आए उद्यमियों ने अपनी प्रेरक यात्रा साझा की:
- चंपावत के राहुल नारियाल ने सौर ऊर्जा और बैटरी से चलने वाली हाइब्रिड कार विकसित करने की जानकारी दी।
- उत्तरकाशी के जयप्रकाश ने एक गाय से शुरू कर सरकारी सहायता से 5 बद्री और 8 देशी गायों के साथ सफल डेयरी स्थापित की।
- पौड़ी के नवीन पटवाल ने गुच्छी (मशरूम) की व्यावसायिक खेती के जरिए स्थानीय रोजगार सृजन का मॉडल प्रस्तुत किया।
- उधम सिंह नगर के विकास कुमार शाह ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ 10 करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक टर्नओवर वाला स्टार्टअप संचालित कर रहे हैं।
- चमोली के राजेश ने गांव लौटकर रोजमेरी व हर्बल उत्पादों की खेती शुरू की, जबकि चमोली के ही हरपाल नेगी ने घेस क्षेत्र के 300 ग्रामीणों को कुटकी जैसी औषधीय खेती से जोड़कर सालाना 1.5 से 2 करोड़ रुपये की आय का जरिया बनाया।
- नैनीताल की कमला देवी ने टायर मरम्मत के कार्य से आत्मनिर्भर बनने की कहानी साझा की, वहीं टिहरी की सपना राणा ने ‘मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना’ के तहत जर्मन भाषा सीखकर जर्मनी में नर्सिंग क्षेत्र में रोजगार प्राप्त करने का अनुभव बताया।
इसके अलावा सिंगापुर से वर्चुअली जुड़े टनकपुर के शैलेश (सीवेज वाटर ट्रीटमेंट विशेषज्ञ), समावेशी शिक्षा पर कार्यरत अनीता शर्मा थपलियाल, पीरुल (चीड़ की पत्तियों) से उत्पाद बनाने वालीं गीता पंत व सुमन पंथारी, और मिलेट आधारित बेकरी चलाने वाली कल्पना बिष्ट के प्रयासों को भी खूब सराहा गया।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों, स्थानीय उत्पादों और युवाओं की प्रतिभा के दम पर उत्तराखंड स्वरोजगार और नवाचार का सशक्त केंद्र बन रहा है।




