
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के क्षेत्रीय मुद्दों और प्राथमिकताओं पर सीधा ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य से एक नई प्रशासनिक पहल शुरू की है। इसके तहत राज्य मंत्रिमंडल की बैठकों को राजधानी देहरादून से बाहर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में आयोजित किया जा रहा है।
इस पहल की शुरुआत 4 अक्टूबर को भारत-नेपाल सीमा से सटे चंपावत जिले के बनबसा से हुई, जहां आयोजित पहली बैठक में सीमांत जिलों के बुनियादी ढांचे से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसके बाद 12 अक्टूबर को दूसरी कैबिनेट बैठक धर्मनगरी हरिद्वार में आयोजित की गई।
हरिद्वार में हुई बैठक में धामी कैबिनेट ने कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों पर मुहर लगाई, जिनमें वर्ष 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ के लिए ढांचागत विकास की स्वीकृतियां और राज्य की समूह ‘ग’ सरकारी नौकरियों में सेवानिवृत्त अग्निवीरों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का बड़ा फैसला शामिल है। सरकार का कहना है कि राजधानी से बाहर दूर-दराज के क्षेत्रों में जाकर फैसले लेने से स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित हो रहा है।
दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राजधानी से बाहर कैबिनेट बैठकों के आयोजन पर कड़े सवाल खड़े किए हैं और इसे जनता के पैसों का दुरुपयोग बताते हुए चुनावी स्टंट और ‘फोटो-ऑप’ करार दिया है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 10 वर्षों के कार्यकाल के बाद, जब सरकार का अंत निकट आ चुका है, तब भाजपा को जनता के दरवाजे की याद आई है। गोदियाल ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार गलत बीमारी की दवा देने का दिखावा कर रही है, जबकि जनता की वास्तविक जमीनी समस्याएं पूरी तरह अलग हैं।




