
अंकिता भंडारी हत्याकांड में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई, निष्पक्ष जांच, प्रभावी अभियोजन और पीड़ित परिवार की सहायता सुनिश्चित करने के लिए कई ठोस और महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। महिला सुरक्षा और अपराधियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए, सरकार ने घटना के सामने आने के 24 घंटे के भीतर ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर गहन जांच करने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए तत्काल एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया, जिसने पूरे प्रकरण को पूरी गंभीरता के साथ संभाला।
एसआईटी द्वारा की गई इस गहन जांच में जुटाए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय में समयबद्ध तरीके से आरोप पत्र (चार्जशीट) दायर किया गया। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष रखा और आरोपियों के खिलाफ सख्त गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई सुनिश्चित की।
इसी सुदृढ़ न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय द्वारा दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। राज्य सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम में यह सुनिश्चित किया कि कानूनी और अभियोजन की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पारदर्शी तरीके से चले, जिसमें जमानत से जुड़े न्यायिक आदेशों का भी उचित अनुपालन किया गया।
कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ राज्य सरकार ने पूरी संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़ित परिवार की भावनाओं और मांगों को सर्वोच्च महत्व दिया। न्यायिक प्रक्रिया के दौरान परिवार की चिंताओं और उम्मीदों का सही प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए, उनके अनुरोध पर सरकारी वकीलों को तत्काल प्रभाव से बदल दिया गया।
इतना ही नहीं, जब अंकिता के माता-पिता ने मामले में और अधिक पारदर्शिता की मांग करते हुए सीबीआई जांच का आग्रह किया, तो मुख्यमंत्री ने बिना किसी देरी के उनकी इस मांग को स्वीकार करते हुए सीबीआई जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। सरकार का यह रुख स्पष्ट करता है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में केवल प्रशासनिक कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानून के दायरे में रहते हुए पीड़ित परिवार का अटूट विश्वास बनाए रखना भी एक जवाबदेह शासन की मुख्य पहचान है।
अंकिता के निधन के बाद उपजे दुख और संघर्ष के बीच, परिवार को आर्थिक और सामाजिक रूप से संबल प्रदान करने के लिए राज्य सरकार की ओर से 25 लाख रुपये की वित्तीय सहायता राशि प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, परिवार के सदस्यों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए भी सकारात्मक कदम उठाए गए।
इन समग्र प्रयासों के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले किसी भी अपराध से अत्यंत सख्ती से निपटा जाएगा। अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की यह पूरी प्रक्रिया केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला सुरक्षा, संवेदनशील प्रशासन और कानून के शासन में आम जनता के विश्वास को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर है।



